कमजोर पर ज़ोर, यह है सवर्ण फेमिनिज़्म का दौर!

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By- Deepali Tayday

“कमजोर पर ज़ोर… यह है सवर्ण फेमिनिज़्म का दौर” इस बात का ताज़ा उदाहरण दिखा, मुम्बई के ओशिवरा में जब रात के एक बजे शराब के नशे में धुत सो कॉल्ड मॉडल मेघा शर्मा अपार्टमेंट में रात में ड्यूटी कर रहे गार्ड के साथ बेहद मारपीट-गालीगलौच और झूमा-झटकी की……। मेघा शर्मा यहीं पर नहीं रुकी, बल्कि गार्ड पर असॉल्ट करने का झूठा इल्ज़ाम लगाकर 100 नम्बर डायल करके पुलिस को भी बुला लिया। और फिर चीखते-चिल्लाते हंगामा करते हुए पुलिस, गार्ड और अपार्टमेंट के लोगों के बीच में सरेआम कपड़े उतारकर ब्रा-पेंटी में खड़ी हो गईं।

दरअसल, मेघा चाहती थी कि ड्यूटी पर मौजूद गार्ड अपनी ड्यूटी छोड़कर मोहतरमा के लिए सिगरेट लाए क्योंकि वो बहुत ज़्यादा शराब पी हुईं थी। जब गार्ड ने मना किया तो मेघा शर्मा गार्ड पर टूट पड़ी।

मेघा शर्मा की बात भी सही है गार्ड की इतनी औकात थी क्या जो मैडम की बात नहीं मानी। एक रईस, संस्कारी, वेलकल्चर्ड, हाइसोसाइटी की हाईप्रोफाइल लड़की वो भी ब्राह्मण गार्ड की हिम्मत कैसे हुई सिगरेट लाने के लिए मना करने के लिए। मैडम की डिग्निटी हर्ट हुई इसलिए डिग्निटी बचाने के लिए उसने गार्ड को लात-घूसे-थप्पड़ जड़े और अपनी डिग्निटी की रक्षा के लिए अपने कपड़े उतार कर फेक दिए। मेघा शर्मा को तो न्याय मिलना ही चाहिए ना।

तो मोहतरमा को जो न्याय दिया जा रहा है उसके तहत जेल कौन गया गार्ड। वो गार्ड जो दीवाली मनाने के लिए साहेब लोगों से ईमान पाने और अपनी सैलरी का वेट कर रहा था। वो पुलिस कॉन्स्टेबल जो उस दिन ड्यूटी पर पहुँचे थे।

मीडिया ब्राह्मण औरत मेघा शर्मा पर हुए ज़ुल्म की कहानी गा रही औऱ सवर्ण फेमिनिज़्म #MeToo कैम्पेन में इस घटना को शामिल करके लड़की की बदतमीजी को न्याय की लड़ाई बता रहा।

ये सारा घटना क्रम दिखाता है कि सवर्ण फेमिनिज़्म, MeToo कैम्पेन और महिला सशक्तिकरण की दिशा आख़िर क्या है?

~ Deepali Tayday

(यह लेखक के अपने निजी विचार है जिनको बदला नहीं गया है)

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