मोदी सरकारने हे काम पूर्ण करावे, मग देशाचा प्रत्येक थेंब सुखी होईल
करून- सिद्धार्थ रामू ~
सर्व मूलभूत समस्यांचे निराकरण देशातील अब्जाधीशांकडे आहे. 1 टक्केवारी संपत्ती कर आणि वारसा कर लादून हे केले जाऊ शकते? क्या आप यह तथ्य जानते हैं? नहीं जानते हैं, तो जरूर जान लीजिए, क्योंकि देश के बहुसंख्यक जनता की जिंदगी से जुड़ा प्रश्न है?
जर देशातील सर्व अब्जाधीशांची संपत्ती 1 टक्केवारी कर लावावा आणि जे दरवर्षी त्यांच्या वारसांना मालमत्ता हस्तांतरित करतात 5 प्रतिशत बेलनेयरों पर विरासत टैक्स लगा दिया जाए तो देश की व्यापक जनता की सभी बुनियादी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
देश के सभी बिलनेयरों की कुल संपत्ति 560 लाख करोड़ है। इस पर 1 प्रतिशत का संपत्ति कर लगाने से देश को 5.6 लाख करोड़ की आय होगी।
इस देश में प्रति वर्ष करीब 5 प्रतिशत बिलनेयर अपनी संपत्ति अपने वारिसों या अन्य को हस्तांतरित करते हैं। यदि इस पर 33 प्रतिशत विरासत कर लगा दिया जाए तो इससे 9.3 लाख करोड़ की आमदनी होगी। यहां यह तथ्य बता देना जरूरी है कि पूंजीवाद के आदर्श मॉडल अमेरिका में विरासत टैक्स करीब 40 टक्केवारी आहे. जपान मध्ये 55 टक्के आणि दक्षिण कोरियामध्ये 50 प्रतिशत है। हमारे देश में विरासत कर नहीं लगता है। इस बार उम्मीद थी कि शायद बजट में विरासत कर लगाया जाए।
इन दोनों करों से कुल मिलाकर तकरीबन 15 लाख करोड़ रुपये की आमदनी होगी। इससे देश की व्यापक जनता की करीब-करीब सभी बुनियादी समस्याओं का निराकरण किया जा सकता है। जिन समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। वे निम्न हैं-
1-भारत के सभी लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है। जिसका मतलब है कि भोजन का अधिकार लागू किया जा सकता है।
2-प्रत्येकाला हमीदार रोजगाराचा हक्क प्रदान करता येईल.
3-इयत्ता आठवीपर्यंत प्रत्येकाला दर्जेदार शिक्षण दिले जाऊ शकते.
4-सबको गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य प्रदान किया जा सकता है।
5-सभी बुजुर्गों को प्रतिमाह 2000 रुपया पेंशन प्रदान किया जा सकता है।
6-सर्व दिव्यांगांना आवश्यक सुविधा व साधने उपलब्ध करून दिली जाऊ शकतात.
हे काम देशभक्त राष्ट्रवादी सरकार का करत नाही?, जे गरीबांसाठी जगतात आणि मरतात आणि स्वतः गरिबीत का जगतात? (चहा विक्रेते) आपले पंतप्रधान हे पाऊल उचलत नाहीत? हे एक छोटेसे पाऊल टाकले तर सर्वसामान्यांचे जीवन बऱ्याच अंशी सुखकर होऊ शकते., तर हे करायला काय हरकत आहे? सरकार देशातील जनतेसाठी एवढे करू शकत नाही का?? असे केल्यास देशातील सर्व जनता काही प्रमाणात आनंदी जीवन जगू शकेल., मग हे करायला नको का??
तीच गोष्ट आजच्या भाजप आणि काँग्रेसला लागू पडते.
मौलाना आझाद आणि त्यांच्या पुण्यतिथीनिमित्त त्यांचे स्मरण
मौलाना अबुल कलाम आझाद, मौलाना आझाद म्हणूनही ओळखले जाते, एक प्रख्यात भारतीय विद्वान होते, फ्रीडो…






