मजदूरी और अशिक्षा के शिखर पर बहुजन बच्चों का कैसा ये बाल दिवस

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ब्राह्मण ठाकुर और वैश्य समाज में गरीब होंगे. लेकिन उनके बच्चे मजदूरी नही करते उनके बच्चे बाल मजदूर नही हैं. बाल मजदूर सिर्फ ओबीसी एससी एसटी और मुसलमान समुदाय में मिलेंगे. मुसलमान में भी केवल भारतीय मूल के मुसलमान बेहद गरीब हैं. अशरफ(विदेशी मूल) समुदाय के मुसलमानों के बच्चे तो विदेशों में पढ़ते हैं. उनके बाप दादा हर बड़ी छोटी पार्टी में नेता हैं . भारत में 1,60,00,000 बाल मजदूर हैं. जिनकी उम्र 5 से 14 साल के बीच है. पढ़ाई लिखाई खेलने कूदने की उम्र में उन्हें श्रम करना होता है. तब जाकर उन्हें दो वक़्त की रोटी नसीब होती है .

बाल मजदूरी का कारण ?
बाल मजदूरी का कारण गरीबी है. ऐसा नही है कि माँ बाप अपने बच्चों को पढ़ाना नही चाहते. आप ही सोचिए जो परिवार फटे कपड़े पहनकर दो वक़्त का भोजन ठीक से नही कर पाता कैसे वो लोग अपने बच्चों को पढ़ा पाएंगे. भारत में कांग्रेस बीजेपी और सभी क्षेत्रीय दलों ने जिस तरह से शिक्षा का निजीकरण किया उससे तो उम्मीद कम है. कि आगे भविष में मध्यवर्ग अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिला पाएंगे.

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की सरकारों ने कभी ईमानदारी से काम ही नही किया. गरीबी मिटाना है. तो कई दशक तक शिक्षा और स्वास्थ्य मुफ्त उपलब्ध काराना होगा. हर सरकार को पता है. गरीब सिर्फ गरीब नही होता. गरीब का अर्थ है. ओबीसी एससी एसटी और स्थानीय मुसलमान. सरकार ब्राह्मण सरकार होती है उसे जानकारी है. सवर्णो के पास भूमि है. उनकी आर्थिक सामाजिक स्थिति मजबूत है. इसी कारण भारत में शिक्षा को महंगा रखा गया है. ताकि गरीब के पहुंच से दूर रहे और उसे गरीब के चक्र में उलझाओ की शिक्षा के बारे सोचने से पहले वो रोटी के बारे में सोचे . बाल दिवस की बधाई उन्हें मुफ्त शिक्षा चाहिए.

✍Kranti Kumar

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