Home International पकिस्तान को आर्थिक रूप बर्बाद करने का पूरा प्लान बनाया ट्रम्प ने
International - May 24, 2017

पकिस्तान को आर्थिक रूप बर्बाद करने का पूरा प्लान बनाया ट्रम्प ने

नई दिल्‍ली (स्‍पेशल डेस्‍क)। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ट ट्रंप ने पद संभालते ही कुछ ऐसे फैसले लिए हैं जिनके लिए वह हमेशा ही चर्चा में रहेंगे। फिर चाहे वह ट्रेवल बैन का फैसला हो या फिर वीजा नियमों में बदलाव को लेकर किया गया कोई फैसला हो। इन दोनों ही फैसलों से कई देशों के लाखों लोग सीधेतौर पर प्रभावित हुए हैं। वहीं दूसरी ओर उनकी कई मामलों में बेहद स्‍पष्‍ट नीति भी रही है। यह नीति है, एक हाथ दो तो दूसरे हाथ लो। इसका अर्थ है कोई भी चीज एक तरफा नहीं हो सकती है दोनों को ही बराबर आकर एक दूसरे को बराबर अहमियत देनी होगी। उनकी यही सोच चीन को लेकर ‘वन चाईना पॉलिसी’ पर भी साफतौर पर दिखाई देती है, जो चीन के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। अब ऐसी ही परेशानी चीन के सबसे करीबी पाकिस्‍तान को भी हो सकती है। इसकी वजह है ट्रंप का कांग्रेस में पेश किया गया नया प्रस्‍ताव।
दरअसल, डोनाल्‍ड ट्रंप पाकिस्‍तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद को कर्ज में बदलना चाहते हैं। उन्‍होंने कांग्रेस के सामने अपने वार्षिक बजट में एक प्रस्‍ताव पेश किया है। इसके तहत वह पाकिस्‍तान को दी जाने वाली करोड़ों डॉलर की आर्थिक मदद को कर्ज में तब्‍दील करना चाहते हैं। हालांकि उन्‍होंने इस प्रस्‍ताव पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार विदेश मंत्रालय पर छोड़ा है। व्‍हाइट हाउस के मुताबिक ट्रंप प्रशासन पाकिस्‍तान के लिए चलाए जा रहे अपने विदेशी सैन्‍य वित्‍तपोषण कार्यक्रम को मदद से बदलकर वित्‍तीय कर्ज के दायरे में लाना चाहता है। यदि ऐसा होता है तो पाकिस्‍तान के लिए यह काफी चिंता की बात होगी। चिंता की बात इसलिए भी होगी क्‍योंकि यदि ट्रंप अपने मकसद में सफल हो जाते हैं तो पाकिस्‍तान को यह कर्ज चुकाना होगा जिसके चलते उसकी आर्थिक हालत और खराब हो सकती है। अमेरिकी सीनेट में यह बात पहले भी कई बार सुनाई दी है कि 9/11 हमले के बाद पाकिस्तान को सुरक्षा और आर्थिक मदद के तौर पर अमेरिका ने जो 30 अरब डॉलर की सहायता दी है उसका उसे कोई फायदा नहीं हुआ है।
दरअसल, पाकिस्तान गठबंधन सहायता कोष के तहत अमेरिका से मदद पाने वाला सबसे बड़ा देश है। माना यह भी जा रहा है कि पाकिस्‍तान और चीन की नजदीकियां अमेरिका को रास नहीं आ रही हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि चीन ने 2030 तक पाकिस्‍तान में ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और उद्योग के क्षेत्र में 46 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। यह इतनी बड़ी राशि है जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है। वहीं दूसरी और कई अमेरिकी सीनेटर पाकिस्‍तान को आतंकियों की पनाहगाह के तौर पर देखते हैं। ट्रंप से पहले अमेरिका की सत्‍ता में जो भी रहा उन्‍होंने हमेशा ही पाकिस्‍तान को कई मामलों में आर्थिक मदद दी थी। लेकिन यहां पर डोनाल्‍ड ट्रंप की सोच काफी अलग है। यहां पर यह भी ध्‍यान रखना बेहद जरूरी है कि अमेरिका की तरफ से पाकिस्‍तान को लगातार अरबों डॉलर की मदद की जाती रही है। फिर वह चाहे हक्‍कानी नेटवर्क को खत्‍म करने के लिए हो या फिर सैन्‍य उपकरणों की खरीद के लिए। वहीं दसूरी ओर पाकिस्‍तान इस मदद को हमेशा से ही दूसरे कामों में लगाता रहा है, जिसका जिक्र कई बार अमेरिकी सीनेट में भी उठा है। कई बार अमेरिकी सांसदों ने इस तरह की मांग की है कि पाकिस्‍तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद को रोक दिया जाना चाहिए, क्‍योंकि जिसके लिए यह दी जाती है पाकिस्‍तान इस रकम को उस मद में खर्च न कर दूसरे कामों में इस्‍तेमाल कर रहा है।
9/11 हमले के बाद पाकिस्‍तान और अमेरिका के बीच रिश्‍तों में कुछ बदलाव देखने को मिला था। वर्ष 2015 में अमेरिकी कांग्रेस ने पाकिस्तान को 532 मिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। वहीं, वर्ष 2016 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने पाकिस्तान के लिए 90 करोड़ डॉलर की आर्थिक और अन्य सहायता के वादे से संबंधित एक रक्षा विधेयक को पारित किया था। हालांकि इसके बाद पाकिस्‍तान को मिलने वाली 30 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद को रोक दिया गया था। इसको लेकर पाकिस्‍तान ने सीधेतौर पर भारत पर आरोप लगाया था। इस मदद को रोकने के बाद पाकिस्‍तान तिलमिला गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस में 11 सौ अरब डॉलर (करीब 72 हजार अरब रुपये) के बजट का प्रस्ताव रखा। इसमें विदेशी सहायता में 28 फीसद कटौती का प्रस्ताव किया गया है। इससे पाकिस्तान जैसे वे देश प्रभावित होंगे जो काफी मात्रा में अमेरिका से सहायता राशि प्राप्त करते हैं। वहीं अमेरिका ने अपने रक्षा खर्च में 54 अरब डॉलर का इजाफा करने का प्रस्ताव किया है। इतना ही नहीं अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संगठनों और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दी जाने वाली आर्थिक मदद में भी कटौती का प्रस्ताव किया है। अमेरिका की ओऱ से पाकिस्तान में विस्थापितों के पुर्नवास के लिए दी जाने वाली 250 अमेरिकी डॉलर की राशि रोक दी गई है। ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि अमेरिका अपने खर्चे पर न तो किसी की मदद करेगा और न ही इसके लिए आगे आएगा। कहने का अर्थ है कि अमेरिका की मदद के लिए अन्‍य देशों को पूरी कीमत चुकानी होगी। दक्षिण कोरिया में थाड मिसाइल प्रणाली के तैनाती के बाद अमेरिका ने इसके रख-रखाव के लिए वहां की सरकार से रकम की मांग की थी। इसको लेकर दोनों ही देशों में कुछ तनाव भी देखने को मिला था। इसी दौरान डोनाल्‍ड ट्रंप ने यह बात कही थी कि अमेरिका अपने खर्चे पर किसी की मदद नहीं करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Check Also

The Rampant Cases of Untouchability and Caste Discrimination

The murder of a child belonging to the scheduled caste community in Saraswati Vidya Mandir…