Home International Human Rights शाहू महाराज का जन्म दिन ईद-दीवाली की तरह मनाओं -डॉ आंबेडकर

शाहू महाराज का जन्म दिन ईद-दीवाली की तरह मनाओं -डॉ आंबेडकर

छत्रपति शाहू जी की आज जयंति है. छत्रपति शाहू जी महाराज मराठा के भोसले राजवंश के राजा और कोल्हापुर की भारतीय रियासतों के महाराजा थे. उनका जन्म 26 जून 1874 में हुआ था. उन्हें लोकतांत्रिक और सामाजिक सुधारक माना जाता था. इन सबके बीच उच्च वर्गीय लोगों की बहुजनों के प्रति साजिशों को देखते हुए उन्होंने पिछड़े समाज को उनका अधिकार दिलाने के लिए आरक्षण की शुरुआत की थी.

दरअसल, छत्रपति शाहू ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने राजा होने के बावजूद बहुजनों और शोषित वर्ग के पीड़ीतों का कष्ट समझा और उनसे हमेशा तालमेल बनाए रखा. शाहू जी महाराज ने बहुजनों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया भी शुरू की थी. उन्होंने गरीब छात्रों के लिए छत्रावास स्थापित किए. शाहू जी महाराज के मन में बहुजनों के प्रति अपनापन और गहरा लगाव था. बहुजनों की दशा में बदलाव लाने के लिए उन्होंने कई विशेष प्रथाओं का खात्मा किया.

वहीं आज उनकी जयंती पर हर जगह बहुजनों में शाहूजी महाराज को याद किया जा रहा है. इस मौके पर कई वरिष्ठ पत्रकारों और बहुजन समाज को समर्पित लोगों ने उन्हें याद कर नमन किया है.

फेसबुक पर दिलीप मंडल लिखते हैं-
‪शिवाजी महाराज के वंशज, भारत में दलितों, आदिवासियों और पिछड़ी जातियों के आरक्षण के जनक, बाबासाहेब को मूकनायक निकालने में मदद करने वाले शाहूजी महाराज को नमन।‬
‪#आरक्षण के जन को नमन‬

फेसबुक पर जयंत जिज्ञासू लिखते हैं-
भारत में आरक्षण के जनक, शिवाजी के वंशज व कोल्हापुर के राजा शाहूजी महाराज (26 जून 1874 – 6 मई 1922) की आज जयन्ती है। अपने पुरखे को शत-शत नमन!
“छत्रपति शाहू जी महाराज का जन्मदिन ईद-दीवाली की तरह मनाओ।” – बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर

फेसबुक पर राजेंद्र प्रसाद सिंह लिखते हैं-
आधुनिक एवं जाति आधारित आरक्षण के जनक और छुआ-छूत के घोर विरोधी छत्रपति शाहूजी महाराज का आज जन्मदिन है. आरक्षण किस जाति को मिले, शाहूजी के लिए यह महत्वपूर्ण नहीं था. आरक्षण किस जाति को न मिले, शाहूजी के लिए यहीं महत्वपूर्ण था. नौकरियों में जिन 4 जातियों का वर्चस्व था, उन्हें छोड़कर शाहूजी ने बगैर भेदभाव किए सभी जातियों को आरक्षण दे दिए. समाज में फैली अनेक जातियों का सर्वे न करा कर शाहूजी ने नौकरियों में वर्चस्व प्राप्त जातियों का ही सर्वे करा लिए. पूरा पहाड़ उठाए बिना आरक्षण देने का यहीं सुगम मार्ग था. आखिरकार आरक्षण तो नौकरी में देना था सो उन्होंने नौकरी का ही जातिगत सर्वे करा लिए. फालतू का झंझट फेंक दिए. आरक्षण का वह गजट 26 जुलाई, 1902 दिन शनिवार को प्रकाशित हुआ था.
जयंती पर जय!!!

छत्रपति शाहू महाराज जी की जयंती पर उन्हें याद करते हुए डॉ मनीषा बांगर कहती हैं-
शाहू महाराज राजा होने के बावजूद भी कभी कोलहपुर की प्रजा के साथ राजा जैसा बर्ताव नही किया. बल्कि राज होने के बावजूद ब्राह्मनों ने उनके साथ शुद्र जैसा व्यव्हार किया. शाहू महाराज शिवाजी के वंशज है. उन्होंने शिवाजी के वंशज होने के नाते लोकतांत्रित, सबको साथ लेकर चलने वाले, ईमानदार, शत्रुओं के लिए शत्रु और मित्रों के लिए मित्र वाले बर्ताव अपनाएं जैसे शिवाजी ने अपने कार्यकाल में किया था. इसके अलावा शिवाजी के कार्यकाल में महिलाओं को उच्चा स्थान प्राप्त सहित पूरा सम्मान था. शुद्रो-अति शुद्रों को सम्मान प्राप्त था, वहीं पूरी की पूरी कार्यशैली शाहू महाराज ने भी अपने कार्यकाल में जारी रखी. जबकि आधुनिक काल में शाहू महाराज और भी आगे निकल गए, अंग्रेजों के साथ में मिलकर उन्होंने स्वतंत्र होकर सारे कल्याणकारी नियम लागू किए. वह पूरे विश्व में अपने राज्य के समय ऐसे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने प्रतिनिधित्व को जगह दी. इस तरह से वह प्रतिनिधित्व के प्रेरणा हुए. डॉ अम्बेडकर ने जो कहा कि शाहू महाराज का जन्मदिन ईद-दीवाली की तरह मनाया जाए, वो वाकई में सही है. क्योकि एक तरफ जहां शाहू महाराज ने डॉ अम्बेडकर को समाज से वंचित लोगों का नेता करके पहचान करवाई. ये एक तरह की भविष्यवाणी थी कि ये नेता आपको बहुत आगे तक ले जाएगा. उसी तरह से डॉ अम्बेडकर ने भी शाहू महाराज का कल्याणकारी रुप अपनाया और प्रेरणा लेते रहे. यह महाराष्ट्र की भूमि में एक कड़ी बनती गई जिसे आगे लेकर बढ़ते रहे शिवाजी, शिवाजी के बाद सावित्री बाई फूले और फिर छत्रपति शाहूजी महाराज और उनके बाद डॉ अम्बेडकर ने इस कड़ी को आगे जोड़े रखा. वहीं शाहू महाराज ने अपने कार्यकाल में जो ब्राह्मनों की दमनकारी व्यवस्था थी उसे चुनौती दी और उनके समकालिन आदर्श बालगंगा धरतिलक के कड़े प्रतिरोध के बावजूद भी शाहू महाराज अपने समय में जितना कुछ करना चाहिए उससे कई ज्यादा काम उन्होंने किया. डॉ मनीषा बांगर कहती है कि हम उनसे प्रेरणा लेते है और उनके शुक्रगुजार है.

अनगिनत चुनौतियों का सामना करते हुए , ब्राह्मणों की ओर से कड़ा विरोध सेहते हुए प्रतिनिधित्व के लोकतांत्रिक न्यायिक सिद्धान्त को भारत में सर्वप्रथम अपने राज्य (१९०२) में लागू करने वाले महान नायक छत्रपति शाहू महाराज जी हर एक कसौटी पर रयत के राजा थे.
आज २६ जून उनकी जयंती है.
बहुजन समाज को अनेक बधाइयां
छत्रपति शाहू महाराज को कोटि कोटि नमन !
डॉ मनीषा बांगर

(अब आप नेशनल इंडिया न्यूज़ के साथ फेसबुक, ट्विटर और यू-ट्यूब पर जुड़ सकते हैं.)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

बालेश्वर यादव की पूरी कहानी !

By_Manish Ranjan बालेश्वर यादव भोजपुरी जगत के पहले सुपरस्टार थे। उनके गाये लोकगीत बहुत ही …