گھر سماجی صحت مشہور جریدے دی لانسیٹ نے بھارت میں کورونا کی خوفناک صورتحال کا ذمہ دار مودی حکومت کو ٹھہرایا۔
صحت - ہندی - بین اقوامی - مئی 9, 2021

مشہور جریدے دی لانسیٹ نے بھارت میں کورونا کی خوفناک صورتحال کا ذمہ دار مودی حکومت کو ٹھہرایا۔

دنیا کے مشہور طبی جریدے دی لانسیٹ نے اپنے 8 مئی کے شمارے کے اداریے میں پی ایم مودی پر تنقید کرتے ہوئے لکھا ہے کہ ان کی توجہ ٹوئٹر اور کوویڈ پر اپنی تنقید کو دبانے پر زیادہ ہے۔ – 19 وبا پر قابو پانے میں کم ہے۔.

جرنل نے لکھا, “ऐसे मुश्किल समय में मोदी की अपनी आलोचना और खुली चर्चा को दबाने की कोशिश माफ़ी के काबिल नहीं है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के अनुमान के मुताबिक़ भारत में एक अगस्त तक कोरोना महामारी से होने वाली मौतों की संख्या 10 लाख तक पहुंच सकती है.

लैंसेट के मुताबिक़ कोरोना के ख़िलाफ शुरुआती सफलता के बाद से सरकार की टास्क फ़ोर्स अप्रैल तक एक बार भी नहीं नहीं मिली.

जर्नल के मुताबिक, “इस फ़ैसले का नतीजा हमारे सामने है. अब महामारी बढ़ रही है और भारत को नए सिरे से क़दम उठाने होंगे. इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार अपनी ग़लतियों को मानती है और देश को पारदर्शिता के साथ नेतृत्व देती है या नहीं.

जर्नल के मुताबिक़ वैज्ञानिक आधार पर पब्लिक हेल्थ से जुड़े क़दम उठाने होंगे. लैंसेट ने सुझाव दिया है कि जब तब टीकाकरण पूरी तेज़ी से नहीं शुरू होता, संक्रमण को रोकने के लिए हर ज़रूरी क़दम उठाने चाहिए.

जैसे-जैसे मामले बढ़ रहे हैं, सरकार को समय पर सटीक डेटा उपलब्ध कराना चाहिए, ہر 15 दिन पर लोगों को बताना चाहिए कि क्या हो रहा है और इस महामारी को कम करने के लिए क्या क़दम उठाने चाहिए. इसमें देशव्यापी लॉकडाउन की संभावना पर भी बात होनी चाहिए.

जर्नल के मुताबिक संक्रमण को बेहतर तरीक़े के समझने और फैलने से रोकने के लिए जीनोम सीक्वेंसींग को बढ़ावा देना होगा.

लोकल स्तर पर सरकारों ने संक्रमण रोकने के लिए क़दम उठाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन ये सुनिश्चित करना की लोग मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, भीड़ इकट्ठा न हो, क्वारंटीन और टेस्टिंग हो, इन सब में केंद्र सरकार की अहम भूमिका होती है.

लैंसेट की इस रिपोर्ट का हवाला देकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. कांग्रेस के नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ट्विटर पर लिखा, “लैंसेट के संपादकीय के बाद, अगर सरकार में शर्म है, को उन्हें देश से माफ़ी मांगनी चाहिए.

टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा ने लिखा, “खुद से लाई नई एक राष्ट्रीय आपदा, ये कहना है लैंसेट का. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बाबा रामदेव को लगता है कि आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं.

जर्नल में सरकार के टीकाकरण अभियान की भी आलोचना की गई. लैंसेट ने लिखा, “केंद्र के स्तर पर टीकाकरण अभियान भी फेल हो गया. केंद्र सरकार ने टीकाकरण को बढ़ाने और 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को टीका देने के बारे में राज्यों से सलाह नहीं ली और अचानक पॉलिसी बदल दी जिससे सप्लाई में कमी हुई और अव्यवस्था फैली.

जर्नल के मुताबिक़ महामारी से लड़ने के लिए केरल और ओडिशा जैसे राज्य बेहतर तैयार थे. वो ज़्यादा ऑक्सीजन का उत्पादन कर दूसरे राज्यों की भी मदद कर रहे हैं. वहीं महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश कोरोना की दूसरी लहर के लिए तैयार नहीं थे और इन्हें ऑक्सीजन,अस्पतालों में बेड और दूसरी ज़रूरी मेडिकल सुविधाओं यहां तक की दाह-संस्कार के लिए जगह की कमी से जूझना पड़ा.

हालांकि लगातार प्रधानमंत्री के कार्य पर सवाल उठाए जा रहे है.

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