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गृह मंत्री क्यो पीट रहे छाती ?

देश के गृह मंत्री, विदेश मंत्री से लेकर सरकार में मौजूद सभी नेता अपने एक खास पत्रकार की गिरफ्तारी पर छाती पीट-पीट कर रो रहे हैं.. ये सब आज कह रहे हैं “अभिव्यक्ति की आज़ादी की हत्या हो रही है.. ये सब कह रहे हैं की लोकतंत्र को शर्मशार किया जा रहा है..

ये सब बातें और ये रुदन एक खास पत्रकार के लिए ही क्यों ?? हाँ इसमें कुछ गलत नहीं, गलत के खिलाफ आवाज़ उठाइए अगर पत्रकार दोषी है तो सजा बिल्कुल होनी चाहिए लेकिन तरीके से..
लेकिन जो पत्रकार टीवी पर नहीं आते या जो मशहूर नहीं है या वो पत्रकर जो सत्ता से सवाल पूछने की हिम्मत रखतें हैं उनकी गिरफ्तारी पर ये सब अन्त्री-मंत्री क्यों मौन धारण कर लेते हैं..

“न्यूज़लांड्री” की एक रिपोर्ट देखें तो वो बताती है कि लोकडाऊन के दौरान दर्जनों पत्रकारों पर हमले हुए और उन्हें गिरफ्तार किया गया.. जिसमें उत्तरप्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, तमिल नाडू आदि राज्यों के पत्रकार शामिल है.. इसमें एम बालाजी, कैमरामैन दामोदरन, मनीष पाण्डे, सुभाष राय, विजय विनीत आदि तमाम पत्रकारों के नाम है जिनकी गिरफ्तारी की अपनी-अपनी कहानी है..
इनमें से तमाम वो नाम हैं जिन्होंने सच दिखाने व बताने की कोशिश की जो सरकार को पसंद नहीं है वो नहीं चाहते थे कि लोकड़ाउन के दौरान सरकार की कमियों को उज़ागर किया जाए.. फिर चाहे जनता किसी भी गर्त में जा रही हो..

आप याद कीजिये वो वक्त जब देश में कोरोना के चलते लोकडाऊन था तब किस तरह से तब्लीगी जमात को कोरोना फैंलाने का कारण बता दिया गया था और सुबह-शाम उसी की ख़बर चलती थी.. “कोरोना जिहाद” जैसा शब्द निकाल दिया गया था.. जिस वक्त लोग तमाम तकिल्फ़ में जी रहे थे , पैदल चलकर घर जानें को मजबूर थे, रेल की पटरियों पर मर रहे थे.. लेकिन जनता को ये बताना था कि मोदी सरकार जो कर रही है सब चंगा कर रही है जिसमें जनता को गुमराह करने का काम उनके खास पत्रकार कर रहे थे.. और जनता को घण्टी, ताली, थाली और चम्मच बजाने को बोल दिया गया था..


सरकार और मीडिया का ये संबन्ध पर BBC को दिए एक इंटरव्यू मे शिकागो यूनिवर्सिटी में क़ानून और पालिटिकल साइंस पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर टॉम गिंसबर्ग की बातों को आप को समझनी चाहिए टॉम मिंसबर्ग भारत आते-जाते रहे हैं और वो मौजूदा सरकार को बारीकी से समझते हैं.. टॉम बताते हैं कि “भारत में मीडिया नियंत्रित है क्योंकि मालिक उनके (प्रधानमंत्री के) दोस्त हैं, साथ ही पत्रकारों को डराया-धमकाया भी गया है.”… आधिकारिक तौर पर सत्ताधारी बीजेपी किसी भी चैनल की मालिक नहीं हैं, हालांकि कई बड़े समाचार चैनल स्पष्ट तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के तरफ़दार दिखाई देते हैं, वो हिंदुत्ववादी विचारधारा का समर्थन करते हैं या फिर किसी न किसी तरह उनके मालिक सत्ताधारी पार्टी से जुड़े है..

कई क्षेत्रीय पार्टियों के सदस्य या समर्थक भी किसी न किसी तरह मीडिया के मालिकाना हक़ से जुड़े हुए हैं ये चैनल इन पार्टियों के पक्ष में एक तरह का माहौल तैयार करते हैं..

ये एकदम सटीक बातें हैं जो देश की मौजूदा मीडिया की सच्चाई है और जबतक इस देश में ऐसा मीडिया रहेगा, लोग बेवकूफ बनते रहेंगे ।

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