एससी ते केंद्र- लस धोरणात सर्व काही ठीक आहे, आपल्या हस्तक्षेपाची आवश्यकता नाही
30 अप्रैल को कोर्ट ने केंद्र से नई वैक्सीन पॉलिसी पर दोबारा विचार करने को कहा था
टीकाकरण नीति को लेकर लगातार घिर रही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना बचाव किया है। रविवार रात केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामें में कहा है कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा।
केंद्र ने अपने हलफनामें में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि 18 पासून 44 साल के लोगों को वैक्सीन लगवाने की मंजूरी सिर्फ इसलिए दी गई है क्योंकि कई राज्य इसकी मांग कर रहे थे और केंद्र सरकार ने वैक्सीन उत्पादकों से राज्यों को एक कीमत पर वैक्सीन सप्लाई करने को कहा है।

आम्ही तुम्हाला सांगतो की केंद्र सरकारला लसीचा एक डोस कुठे मिळणे आवश्यक आहे. 150 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं तो वहीं वैक्सीन निर्माता कंपनियां राज्यों से इसके लिए 300 आणि 400 प्रति डोस रु. मात्र, केंद्र सरकारने आ, यह कहा है कि उसे वैक्सीन की कीमत इसलिए कम चुकानी पड़ रही है क्योंकि उसने बड़ी मात्रा में टीके का ऑर्डर दिया है।
अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा, ‘हे लक्षात घेणे महत्त्वाचे आहे की केंद्र सरकारने मोठ्या प्रमाणात लसीकरण मोहिमेसाठी लसींचे मोठे ऑर्डर दिले आहेत. हे आदेश राज्य सरकार आणि खाजगी रुग्णालयांच्या आदेशापेक्षा खूप मोठे आहेत. त्यामुळे त्याचा परिणाम भावावरही दिसून आला.’ हलफनामे के मुताबिक, अलग-अलग कीमतों से प्राइवेट वैक्सीन निर्माताओं के लिए एक प्रतिस्पर्धी बाजार होगा जिसके परिणामस्वरूप वैक्सीन का उत्पादन बढ़ेगा और उसकी कीमतें भी ज्यादा नहीं होंगी। इससे विदेश वैक्सीन उत्पादक भी देश में वैक्सीन बनाने को प्रोत्साहित होंगे।
केंद्राने असेही म्हटले आहे की किमतीतील या फरकाचा जनतेवर परिणाम होणार नाही कारण सर्व राज्यांनी मोफत लस उपलब्ध करून देण्याची घोषणा केली आहे.

केंद्र सरकार ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा कि वह कोरोना को लेकर जरूरी दवा और अन्य सामग्रियों की सप्लाई से जुड़े स्वतः संज्ञान वाले केस में किसी भी तरह का आदेश पारित न करे। सरकार ने कहा है कि इस महामारी को लेकर सभी नीतियां मेडिकल एक्सपर्टस और वैज्ञानिक सलाहों से तय हो रही हैं, अशा स्थितीत न्यायालयीन हस्तक्षेपाला फारसा वाव नाही.
या प्रकरणी सर्वोच्च न्यायालयाने स्व: दखल घेतली. भूतकाळ 27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने चारों मुद्दों पर केंद्र से जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सीजन की आपूर्ति, कोविड बेड समेत महत्वपूर्ण चिकित्सा आवश्यकताओं में वृद्धि, रेमडेसिविर, फेविपिविर सहित आवश्यक दवाओं की उचित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदम और टीकाकरण को लेकर सवाल किए गए थे।
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