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Culture - Political - Social Issues - July 13, 2020

क्यों आक्रोशित है छत्तीसगढ़ में सतनामी समाज

केंद्र में जब से भाजपा की सरकार आई है, तब से भगवाधारियों के हौसले इस कदर बढ़ गए हैं कि वो अब बहुजन समाज के महापुरुषों का अपमान करने में भी पीछे नहीं रहते। बाबा साहब डॉ अंबेडकर तो उनके निशाने पर रहते ही हैं, पर अब छत्तीसगढ़ में सतनामी समाज के महापुरुष गुरु घासीदास का अपमान करने की एक और घटना सामने आई है जिसके विरोध में पूरे प्रदेश का सतनामी समाज आंदोलित और आक्रोशित हो गया है।

क्या है पूरा मामला

दर्शन शास्त्र छत्तीसगढ़ पीएससी मुख्य परीक्षा के डेस्टिनी पब्लिकेशन रायपुर के संस्थापक निदेशक डॉ मनोज अग्रवाल ने दर्शनशास्त्र की किताब में सतनामी समाज के गुरु घासीदास और सतनामी पंथ की विशेषताएं बताने वाले अध्याय में गुरु घासीदास के लिए संवैधानिक रूप से प्रतिबंधित हरिजन शब्द का इस्तेमाल किया है। हरिजन शब्द महात्मा गांधी ने वर्तमान अनुसूचित जाति के लिए प्रयोग किया था जिसे अब प्रतिबंधित किया जा चुका है। अनुसूचित जाति के लोग इस शब्द को अपने लिए अपमानजनक मानते हैं।

सतनामी समाज का कहना है, ‘ उक्त किताब के पृष्ठ 16 पर, उस शब्द का प्रयोग एक आईएएस अकादमी के संचालक द्वारा किया जाना घोर अपराध है, और जानबूझ कर सतनामी समाज के भावनाओं को आघात पहुंचाया गया है।’

सतनामी समाज में भारी आक्रोश

किताब में गुरु घासीदास के लिए अपमानजनक शब्द के इस्तेमाल की खबर फैलते ही प्रदेश के सतनामी समाज में आक्रोश फैल गया और जगह-जगह समाज के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए। सतनामी समाज ने लेखक और प्रकाशक पर कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने शुरू कर दिए हैं। कई जगह सतनामी समाज के लोगों ने लेखक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है।

जांजगीर जिला के पामगढ़ और अकलतरा थाना में प्रदेश के गृह मंत्री के नाम सतनामी समाज के लोगों ने ज्ञापन सौंपकर पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने और लेखक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

जांजगीर में भीम आर्मी एकता मिशन ने भी लेखक डॉ मनोज अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

कांसाबेल में सतनामी समाज ने थाने जाकर ज्ञापन दिया। इसी तरह से नवागढ़ में सर्व सतनामी समाज के कार्यकर्ताओं ने थाना प्रभारी अंबार सिंग भरद्वाज को ज्ञापन सौंपा तथा पब्लिकेशन के द्वारा लिखे गए कथन को हटाने के लिए ज्ञापन दिया कथन नहीं हटाए जाने पर सतनामी समाज द्वारा उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी।

ज्ञापन के इस कड़ी में मुंगेली में एस पी ऑफिस पहुंचकर सतनामी समाज युवा प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं ने भी लेखक और प्रकाशक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की और ऐसा न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।

सतनामी समाज जिला बलौदा बाजार में गुरु घासीदास बाबा जी के जीवन परिचय में छेड़छाड़ को लेकर सिटी कोतवाली बलौदा बाजार में डॉ मनोज अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर कराई गई और उसकी गिरफ्तारी की मांग की गई।

पहले भी होती रही हैं ऐसी कोशिशें

सतनामी समाज और गुरु घासीदास के जीवन चरित्र को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिशें पहले भी होती रही हैं। कुछ समय पहले भी कबीर पंथ का उद्भव एवं प्रसार नामक किताब में गुरु घासीदास के भाइयों को ईसाई बताया गया था।

लेखक महंत डॉ राजेंद्र प्रसाद की इस किताब में यह भी लिखा था कि गुरु घासीदास ने कबीर की साखियों को विकृत किया था। तब भी सतनामी समाज काफी उग्र हुआ था।



2018 में तो एबीवीपी ने अपने प्रांतीय अधिवेशन के समय कचरे के डिब्बों पर गुरु घासीदास की तस्वीरों के पोस्टर लगा दिए थे। तब प्रदेश में भाजपा के रमन सिंह की सरकार थी। तब सतनामी समाज ने एबीवीपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन भाजपा की सरकार के रहते कुछ नहीं हो सका था।

लेखक ने मांगी माफी

सतनामी समाज के आक्रोश को देखते हुए किताब के लेखक डॉ मनोज अग्रवाल ने माफी मांगी है, लेकिन सतनामी समाज के लोग इतने से संतुष्ट नही हैं। लेखक और प्रकाशक ने अपने माफीनामे में इसे टाइपिंग मिस्टेक बताते हुए क्षमा-याचना की है, जबकि सतनामी समाज का मानना है कि स्पष्ट तौर पर यह टाइपिंग की गलती नहीं है, बल्कि लेखक ने जान-बूझकर प्रतिबंधित शब्द का इस्तेमाल किया है, इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी जरूरी है। समाज की मांग है कि किताब पर प्रतिबंधित किया जाए, और लेखक-प्रकाशक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

सतनामी समाज के वरिष्ठ जनों का कहना है बार-बार ऐसा महापुरुषों के जीवन परिचय के साथ छेड़छाड़ समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। सतनामी समाज इस विषय पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर रहा है। समाज का कहना है कि बार-बार सतनामी समाज और गुरु घासीदास के अपमान की घटनाएं हो रही हैं, और इन्हें अब बरदाश्त नहीं किया जा सकता है।

क्या है सतनामी समाज की अहमियत

छत्तीसगढ़ प्रदेश में सतनामी समाज की आबादी अच्छी-खासी है। कुल वोटों में इस समाज की करीब 16 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। प्रदेश की 14 विधान सभा सीटों पर 20 से 35 प्रतिशत वोट सतनामी समाज के हैं।

इसी वजह से 2017 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी सतनामी समाज को साथ लेने की कोशिश की थी और सतनामी गुरु बालदास से मुलाकात भी की थी।

हालांकि बाद में गुरु बालदास और अन्य सतनामी गुरुओं ने कांग्रेस पार्टी का समर्थन करने का ऐलान किया था। विधानसभा चुनावों में भाजपा की करारी हार में सतनामी समाज का बड़ा हाथ था।

यह लेख वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र यादव के अपने निजी विचार है ।

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