Home Social Culture कट्टर हिदुत्व और उदार हिंदुत्व सार रूप में एक ही है-संदर्भ प्रियंका गांधी द्वारा राम की महिमा का गुणगान
Culture - Political - August 5, 2020

कट्टर हिदुत्व और उदार हिंदुत्व सार रूप में एक ही है-संदर्भ प्रियंका गांधी द्वारा राम की महिमा का गुणगान

राहुल गांधी आजकल पर्दे के पीछे हैं, प्रियंका गांधी कांग्रेस का मुख्य चेहरा बनकर सामने आ रही हैं, उन्होंने राममंदिर भूमिपूजन की पूर्व संध्या पर आज राम का गुणनान प्रस्तुत किया हैं और उनकी सर्वव्यापी उपस्थिति का वर्णन किया है। पूरे वर्णन में मुरारी बापू जैसे कथावाचकों की शैली में राम के चरित्र को उदात्त एवं महान बनाकर प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है। उन्हें भी चिराग पासवान की तरह शबरी तो याद आईं, लेकिन शंबूक को भूल गईं।

इसके पहले राजीव गांधी एवं राहुल गांधी के द्विज ( सवर्ण ) होने का सबूत जनेऊ दिखाकर कांग्रेसी प्रस्तुत कर चुके हैं।

सोने सी दिखती तस्तरी में रखी मिठाई में जहर देने की कांग्रेसियों की पुरानी शैली अब कारगर नहीं रह गई हैं, क्योंकि हिंदुत्व का जो खेल कांग्रेसी पर्दे की पीछे रहकर खेलते थे और भाजपा उसे सामने आकर खुलेआम खेल रही है।

अरे प्रियंका गांधी को खुलकर कहना चाहिए था कि मेरे नाना के जमाने में बाबरी मस्जिद में राम-सीता की मूर्तियां रखी गईं, मेरे पिता जी ने ताला खुलवाया और शिलान्यास की इजाजत दी और कांग्रेस प्रधानमंत्री की मौन सहमति से बाबरी मस्जिद तोड़ी गई। मतलब रामंदिर बनवाने का सर्वाधिक श्रेय मेरे परिवार और कांग्रेस को जाता है। इस तरह से शायद वे हिंदुओं-विशेषकर सवर्ण हिंदुओं को खुश करने में सफलता प्राप्त कर पातीं, लेकिन चूक गईं। वैसे संघी- भाजपाई शायद ही उन्हें श्रेय लेने देते।

करीब सभी आधुनिक बहुजन नायकों की नजर में दशरथ पुत्र राम आर्य-ब्राह्मण संस्कृति एवं वर्ण-जाति व्यवस्था के रक्षक हैं और वे धार्मिक नायक नहीं, बल्कि राजनीतिक नायक हैं और रामायण एवं रामचरित मानस धार्मिक ग्रंथ नहीं,बल्कि आर्य-ब्राह्मण द्विज विजय के महाकाव्य हैं। आकरण नहीं है, दक्षिण में पेरियार एवं उत्तर में राम रामस्वरूप वर्मा रामायण एवं रामचरित मानस को सार्वजनिक तौर जलाते थे और डॉ. आंबेडकर ने राम को भगवान ने मानने की प्रतिज्ञा ली।

राम के मनुष्यता विरोधी चरित्र के बारे में हिन्दू धर्म की पहेलियाँ में डॉ. अम्बेडकर ने विस्तार से लिखा है

आधुनिकाल में हिंदू-महासभा और बाद में संघ हिंदुत्व का कट्टर चेहरा रहे हैं, तो कांग्रेस हिंदुत्व का उदार चेहरा प्रकट करती रही है, लेकिन दोनों को काम एक ही था, वर्ण-जातिवादी हिंदुत्व की रक्षा करना।

इस संदर्भ में डॉ. आंबेडकर ने लिखा है कि “कांग्रेस और हिन्दू महासभा में इतना ही अंतर है कि जहाँ हिन्दू महासभा अपने कथनों में अधिक अभद्र है और अपने कृत्यों में भी कठोर है, वहीं कांग्रेस नीति-निपुण और शिष्ट है। इस तथ्यगत अंतर के अलावा कांग्रेस और हिन्दू महासभा के बीच कोई अंतर नहीं है।”

यही बात आज के भाजपा और कांग्रेस पर भी लागू होती है।

Article by – Siddharth Ramu
Senior Freelance Journalist
Former Editor Forward Press

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