घर भाषा हिंदी एक अशी मीडिया ज्याच्या बातमीने द्वेष पसरला 8 लाखो लोकांना ठार केले
हिंदी - मते - जुलै 16, 2021

एक अशी मीडिया ज्याच्या बातमीने द्वेष पसरला 8 लाखो लोकांना ठार केले

देश में इन सात सालों में बहुत कुछ बदला है. जिसमें मुख्यरूप से जातीय हिंसा, धार्मिक हिंसा और नफरत चरम पर रहा है| इन शर्मनाक घटनाओं पर नजर डाले तो ये आज कल में शुरू नहीं हुआ है| इसकी तैयारी लम्बे अरसे कि जा रही होगी? साहित्यिक पत्रिका “हंस” के मुसलमान विशेषांक के एक लेख में लिखा गया है कि 1977 में केंद्र में बनी जनसंघ की सरकार में सुचना और प्रसारण मंत्री लालकृष्ण आडवानी ने मीडिया में एक खास विचारधारा के लोगों को भरना शुरू किया था| कदाचित हा खेळ 1977 पासून सुरुवात केली असावी| जे आज स्पष्टपणे दिसत आहे| असे लोक आजच्या पत्रकारांनी तयार केले असतील.? जिनकी आज नफरत भरी ख़बरें देखने, सुनने और पढ़ने को मिलती है| इन सात सालों में सबसे ज्यादा नफरत फ़ैलाने में सबसे अहम रोल भारतीय टीवी चैनल और कुछ प्रमुख अख़बार के रहे हैं| मैं यहाँ किसी भी टीवी चैनल या अख़बार का नाम नहीं लूंगा| आप मुझसे बेहतर जानते होंगे कि कौन से न्यूज़ वाले टीवी चैनल और अख़बार में हिन्दू-मुस्लिम, मंदिर मस्जिद पर ज्यादा चर्चा समय समय पर होती रहती है| वो समय दो बार आता है| एक जब देश में कहीं चुनाव हो, दुसरा जब कोई सरकार अपनी नाकामी के कारण घिरी हो| अशा परिस्थितीत वृत्तवाहिन्या आणि प्रमुख वृत्तपत्रे लोकांचे लक्ष विचलित करण्यासाठी हिंदी-मुस्लिम वादावर मथळे काढतात आणि प्रसारमाध्यमांद्वारे लोकांच्या हृदयात आणि मनात द्वेषाचे विष पसरवतात.|

मीडिया द्वारा फैलाई गयी एक ऐसी ही नफरत ने 100 दिनों 8 लाख लोगों को मौत के घाट उतरवा दिया था. आम्ही रवांडा रेडिओ नरसंहाराबद्दल बोलत आहोत जिथे तुत्सी आणि हुतू समुदायांमध्ये मोठ्या प्रमाणात नरसंहार झाला.| 7 एप्रिल 1994 पासून पुढील पर्यंत 100 काही दिवसांपासून अल्पसंख्याक तुत्सी समाजातील लोकांची हुतू समुदायाकडून हत्या करण्यात आली.|

 

या हत्याकांडाची सुरुवात कशी झाली??

इस नरसंहार में हूतू जनजाति से जुड़े चरमपंथियों ने अल्पसंख्यक तुत्सी समुदाय के लोगों और अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया था| छह अप्रैल 1994 की रात तत्कालीन राष्ट्रपति जुवेनल हाबयारिमाना और बुरुंडी के राष्ट्रपति केपरियल नतारयामिरा को ले जा रहे विमान को किगाली, रवांडा में गिराया गया था| इसमें सवार सभी लोग मारे गए| किसने ये जहाज गिराया था, इसका फ़ैसला अब तक नहीं हो पाया है| कुछ लोग इसके लिए हूतू चरमपंथियों को ज़िम्मेदार मानते हैं जबकि कुछ लोग रवांडा पैट्रिएक फ्रंट (आरपीएफ़) करण्यासाठी|

चूंकि ये दोनों नेता हूतू जनजाति से आते थे और इसलिए इनकी हत्या के लिए हूतू चरमपंथियों अल्पसंख्यक तुत्सी समुदाय को ज़िम्मेदार ठहराया| इसके तुरंत बाद हत्याओं का दौर शुरू हो गया|

 

रेडियो से आवाज़ आई- ‘तिलचट्टों को साफ़ करो

रवांडा बहुत ही नियंत्रित समाज रहा है, ज़िले से लेकर सरकार तक| उस समय की पार्टी एमआरएनडी की युवा शाखा थी ‘इंतेराहाम्वेजो लड़ाकों में तब्दील हो गई थी उसने ही इन हत्याओं को अंजाम दिया|

स्थानीय ग्रुपों को हथियार और हिट लिस्ट सौंपी गई, जिन्हें पता था कि उनके शिकार कहां मिलेंगे|

हूतू चरमपंथियों ने एक रेडियो स्टेशन स्थापित किया, ‘आरटीएलएमऔर एक अख़बार शुरू किया जिसने नफ़रत का प्रोगैंडा फैलाया| इनमें लोगों से आह्वान किया गया, ‘तिलचट्टों को साफ़ करोमतलब तुत्सी लोगों को मारो. जिन प्रमुख लोगों को मारा जाना था उनके नाम रेडियो पर प्रसारित किए गए|

त्या हत्यांमध्ये पुजारी आणि नन्सचीही नावे होती, ज्यांनी चर्चमध्ये आश्रय घेतला| 100 या हत्याकांडात एका दिवसात जवळपास 8 लाख तुत्सी समुदाय के लोग मारे गए थे|

ये कहानी मध्य-पूर्व अफ्रीकी में स्थित एक देश की है |हाँ तब की मीडिया रेडियो द्वारा एक दुष्प्रचार ने एक झटके में लाखों लोगों को मरवा दिया|

अब आते हैं सीधे असल मुद्दे पर जो भारतीय टीवी चैनल और कुछ प्रमुख अखबार के कारनामे हैं| भारतीय मीडिया भी अब बिल्कुल निष्पक्ष नहीं रहा गया| वहां भी खबरें टीआरपी, पैसा और ग्लैमर के हिसाब से चलाई जाती है| आपको पिछले साल की एक घटना याद होगी जब सभी मुल्क कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहे थे, तो हमारी मीडिया हिन्दू-मुस्लिम डिबेट करा रही थी|

निजामुद्दीन मरकजवर ज्या प्रकारे टीव्ही चॅनेल्स ओरडत होते, मुस्लिमांना गोत्यात उभे करत होते आणि प्रमुख वृत्तपत्रे त्यांच्या मथळ्यांमध्ये मुस्लिमांना आव्हान देत होती.| वास्तविक, सरकारच्या अपयशाकडे कोणी बोट दाखवू नये आणि हा देश हिंदू-मुस्लिम संघर्षात अडकू नये, असा प्रसार माध्यमांनी केला होता.| आप पिछले साल के सभी न्यूज़ चैनल और प्रमुख अख़बारों को उठा कर देख ले आपको समझ आ जाएगी नफरत फैलाने में मीडिया का कितना बड़ा योगदान रहा है|

अभी कुछ दिन पहले यूपी एटीएस ने धर्मपरिवर्तन कराने के आरोप में दिल्ली से दो मुसलमान व्यक्ति को गिरफ्तार किया है| खैर पुलिस ने कारवाही की और मामला कोर्ट में जाएगा| लेकिन इस घटना पर भी मीडिया का रवैया देख ले तुरंत मीडिया ट्रायल शुरू करके कोर्ट बन जाती है जबकि न्याय देने का अधिकार कोर्ट का है| इस देश में इस तरह की एक दो केस नहीं हैं कई केस मिल जायेंगे आपको|

जब बेवजह UAPA या NSA में कई मुस्लिम 10-20 साल के लिए जेल के अन्दर ठूस दिए जाते हैं और लम्बी कानूनी प्रक्रिया के बाद दस-बीस साल बाद कोर्ट से बाइज्जत बरी होकर निकलते हैं| पण तोपर्यंत तुम्ही सर्व काही गमावले असेल| त्यांच्या अटकेपर्यंत आणि तपासापर्यंत मीडिया दहशतवादी, गद्दारांना इतर कोणती पदके दिली जातात कुणास ठाऊक.| लेकिन जब यही आरोपी कोर्ट द्वारा बाइज्जत बरी होते हैं तो मीडिया इनकी बेगुनाही और सिस्टम द्वारा बनाए गए लाचार को नहीं दिखाती. अशी अनेक प्रकरणे तुम्हाला पाहायला मिळतील|

या सात वर्षांत सर्व टीव्ही चॅनेल्सनी हिंदू-मुस्लिमवर मोठे कार्यक्रम केले, मंदिर-मस्जिद डिबेट में देश को उलझाए रखा है| सुबह से रात तक नफरती डिबेट से देश या जनता को क्या मिलता है| वो आप मुझसे बेहतर जानते होंगे. क्योंकि अब किसी को रोजगार, स्वास्थ्य और सस्ती तथा अच्छी शिक्षा नहीं चाहिए| खैर ऐसे तबकों के लिए रवांडा रेडियों नरसंहार से हुए बर्बादी से भी कोई मतलब नहीं होगा?

नुरुल होदा एक स्वतंत्र पत्रकार है

प्रतिक्रिया व्यक्त करा

आपला ई-मेल अड्रेस प्रकाशित केला जाणार नाही. आवश्यक फील्डस् * मार्क केले आहेत

हे देखील तपासा

मौलाना आझाद आणि त्यांच्या पुण्यतिथीनिमित्त त्यांचे स्मरण

मौलाना अबुल कलाम आझाद, मौलाना आझाद म्हणूनही ओळखले जाते, एक प्रख्यात भारतीय विद्वान होते, फ्रीडो…