घर सामाजिक संस्कृती बी.पी.. मंडल आयोगाच्या अहवालाचे लेखन बदलले 60 कोटी ओबीसी भविष्य !
संस्कृती - राजकीय - ऑगस्ट 25, 2020

बी.पी.. मंडल आयोगाच्या अहवालाचे लेखन बदलले 60 कोटी ओबीसी भविष्य !

एप्रिल महिन्याला सामाजिक न्यायाच्या संदर्भात ऐतिहासिक महत्त्व आहे. 11 एप्रिल हे सामाजिक क्रांतीचे जनक महात्मा ज्योतिबा फुले यांची जयंती असल्याचे कारण महत्त्वाचे आहे., 14 एप्रिलमध्ये बाबासाहेब डॉ.. भीमराव हा आंबेडकर यांचा वाढदिवस आहे आणि त्या दरम्यान 13 अप्रैल को सामाजिक न्याय के प्रणेता बी.पी. मंडल की पुण्यतिथि भी मनाई जाती है। जबकि आज ही के दिन यानि 25 अगस्त को बी.पी. मंडल का जन्म हुआ था।

उनकी अध्यक्षता में लिखी गई दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग, जिसे मंडल कमीशन के लोकप्रिय नाम से जाना जाता है, की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की नौकरियों में पिछड़े वर्गों को 27 परसेंट आरक्षण मिला। इसी आयोग की एक और सिफारिश के आधार पर केंद्रीय शिक्षा संस्थानों में दाखिलों में भी पिछड़े वर्गों को 27 परसेंट आरक्षण दिया गया। इस आयोग की 40 में से ज्यादातर सिफारिशों पर अब तक अमल नहीं हुआ है। अगर भविष्य में कोई सरकार इस दिशा में काम करती है, तो इससे पिछड़ों का भला होगा।

मंडल कमीशन की रिपोर्ट भारत में सामाजिक लोकतंत्र लाने और 52 फीसदी ओबीसी आबादी को राष्ट्र निर्माण में हिस्सेदार बनाने की आजादी के बाद की सबसे बड़ी पहल साबित हुई। जिससे इन वर्गों के लाखों लोगों को नौकरियां मिलीं और शिक्षा संस्थानों में दाखिला मिला। इससे पिछड़े वर्गों की भारतीय लोकतंत्र में आस्था मजबूत हुई और उनके अंदर ये भरोसा पैदा हुआ कि देश के संसाधनों और अवसरों में उनका भी हिस्सा है।

मंडल कमीशन की रिपोर्ट भारत में सामाजिक लोकतंत्र लाने और 52 फीसदी ओबीसी आबादी को राष्ट्र निर्माण में हिस्सेदार बनाने की आजादी के बाद की सबसे बड़ी पहल साबित हुई। जिससे इन वर्गों के लाखों लोगों को नौकरियां मिलीं और शिक्षा संस्थानों में दाखिला मिला। इससे पिछड़े वर्गों की भारतीय लोकतंत्र में आस्था मजबूत हुई और उनके अंदर ये भरोसा पैदा हुआ कि देश के संसाधनों और अवसरों में उनका भी हिस्सा है।

मंडल कमीशन की रिपोर्ट भारत में सामाजिक लोकतंत्र लाने और 52 फीसदी ओबीसी आबादी को राष्ट्र निर्माण में हिस्सेदार बनाने की आजादी के बाद की सबसे बड़ी पहल साबित हुई। जिससे इन वर्गों के लाखों लोगों को नौकरियां मिलीं और शिक्षा संस्थानों में दाखिला मिला। इससे पिछड़े वर्गों की भारतीय लोकतंत्र में आस्था मजबूत हुई और उनके अंदर ये भरोसा पैदा हुआ कि देश के संसाधनों और अवसरों में उनका भी हिस्सा है।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत सरकार द्वारा गठित दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष बी.पी. मंडल का जन्म 25 ऑगस्ट, 1918 को बनारस में हुआ था। मुरहो एस्टेट के ज़मींदार होते हुए भी उन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलन में जमकर हिस्सा लिया। वे बिहार प्रांतीय कांग्रेस कमिटी और एआईसीसी के बिहार से निर्वाचित सदस्य रासबिहारी लाल मंडल के सबसे छोटे पुत्र थे।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत सरकार द्वारा गठित दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष बी.पी. मंडल का जन्म 25 ऑगस्ट, 1918 को बनारस में हुआ था। मुरहो एस्टेट के ज़मींदार होते हुए भी उन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलन में जमकर हिस्सा लिया। वे बिहार प्रांतीय कांग्रेस कमिटी और एआईसीसी के बिहार से निर्वाचित सदस्य रासबिहारी लाल मंडल के सबसे छोटे पुत्र थे।

1968 में उपचुनाव जीत कर बी.पी. मंडल पुनः लोकसभा सदस्य बने. 1972 में वे मधेपुरा विधान सभा से सदस्य चुने गए। 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर मधेपुरा लोक सभा से सदस्य बने, 1977 में जनता पार्टी के बिहार संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के नाते लालू प्रसाद को कर्पूरी ठाकुर और सत्येन्द्र नारायण सिंह के विरोध के बावजूद छपरा से लोकसभा टिकट मंडल जी ने ही दिया। लेकिन उनके योगदान का सही मूल्यांकन होना अभी बाकी है, जिसका आज हर किसी को इंतेजार है।फिलहाल नेशनल इंडिया न्यूज के पूरे परिवार की तरफ से बी.पी मंडल को शत-शत नमन।

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