ઘર સામાજિક રાજનીતિ હિંસક અથડામણમાં નિર્દોષના દાદા મૃત્યુ પામ્યા, વીડિયો વાયરલ થતાંની સાથે જ સરકાર ઉપર સવાલો ઉભા થયા છે!
રાજનીતિ - જુલાઈ 2, 2020

હિંસક અથડામણમાં નિર્દોષના દાદા મૃત્યુ પામ્યા, વીડિયો વાયરલ થતાંની સાથે જ સરકાર ઉપર સવાલો ઉભા થયા છે!

By_શ્યામ મીરા સિંહ

इस देश के नागरिकों को एक चैलेंज दे रहा हूँ, इस कैप्शन में इस बच्चे के लिए सहानुभूति ढूंढिए, इस बच्चे के लिए जताया गया दुख ढूंढिए. ये नेता भाजपा को रिप्रेजेंट करता है. कल दोपहर,तस्वीर में दिखाई दे रहे इस छोटे से बच्चे के रिलेटिव के मरने की खबर आई, किसने मारा ये भी क्लियर तक न हुआ, बस इतना क्लियर था कि सोपोर में दो पक्षों के बीच हो रही हिंसक घटनाओं के बीच इस आम सिविलियन की जान चली गई. घटना के कुछ मिनट बाद ही भाजपा नेता ने न RIP लिखा, न बच्चे के लिए सहानुभूति जताई, लिखा तो सिर्फपुलित्जर अवार्ड?”

इससे पहले स्वयं संबित पात्रा का कोई ट्वीट इस घटना पर नहीं है, घटना के तुरंत बाद 1 વાગ્યા સુધીમાં 28 मिनट संबित ने ट्वीट किया. जिस घटना की सूचना भी देश को ठीक से नहीं हुई थी, न पुलित्जर वालों को न नॉबेल पुरुष्कार वालों को. लेकिन संबित को घटना की अगली मिनट ही अपना राजनीति स्टंट करना था. क्या घटना की अगली मिनट में ही इसपर प्रधानमंत्री का ट्वीट आ गया था? क्या गृह मंत्री का आ गया था? फिर बाकी लोगों का क्या पक्ष है ये कैसे जान लिया? जान तो लीजिए पहले।

और कोई भी जिम्मेदार आदमी होगा वह जानता होगा कि कश्मीर की प्रशासनिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की है? या उन पत्रकारों की है जो वहां की घटनाओं को सामने लाने का काम कर रहे हैं? कोई व्यक्ति इतना इंसेंसिटिव और गलीच कैसे हो सकता है? अपनी दो चवन्नी की राजनीति के लिए कुछ तो इंतजार कर लिया होता. ये आदमी भाजपा को रिप्रेजेंटेट करता है राजनीतिक तौर पर आरएसएस को रिप्रेजेंट करता है। ये तस्वीर भारतीय मानवीय सभ्यता के इतिहास में दर्ज की जानी चाहिए जिससे भविष्य में ये दिखाया जा सके कि चील किस्म के इंसानों ने बिलबिलाते बच्चों पर राजनीति की थी।

भाजपा और आरएसएस को इस तस्वीर को देखकर शर्म आनी चाहिए, वैसे नहीं आएगी मुझे मालूम है, वे इसमें लेफ्ट लिबरल, कांग्रेसी, मुसलमान ढूंढेंगे ताकि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री द्वारा कश्मीर में किए गए अन्याय को ढका जा सके। पर इतना मालूम है कि देश के नागरिक के रूप में ये तस्वीर, निजी तौर पर हम सब के लिए शर्मनाक होनी चाहिए कि हम कैसे नेताओं को चुन रहे हैं।

ये लेख श्याम मीरा सिंह के फेसबुक से साभार लिया गया है.

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