بہوجن برادری کی تحریک کے بعد حکومت بیک فٹ پر, امیت شاہ کی وضاحت
SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कल पूरे देश में भारत बंद रहा जिसका हर राज्य में असर दिखा।
भाजपा पार्टी मुख्यालय में अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को पार्टी के नेताओं के साथ लंबी मीटिंग की। जिसके दौरान 2019 के चुनाव के मद्देनजर संगठन को मजबूत बनाने तथा भविष्य की अन्य रणनीति पर चर्चा हुई। केंद्र में दोबारा वापसी के लिए भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत टीम बनाने की रणनीति बनाई है।
राहुल गांधी की ओर से आरएसएस और बीजेपी के डीएनए पर सवाल उठाने वाले ट्वीट के जवाब में शाह ने लिखा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी के डीएनए पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस ने खुद बाबासाहेब आंबेडकर का दो बार अपमान किया. संसद के सेंट्रल हॉल में उनकी तस्वीर नहीं लगने दी और अपने शासन काल में दशकों तक भारत रत्न नहीं दिया.शाह ने एक और ट्वीट किया, हम अपने दलित भाइयों और बहनों को न्यू इंडिया का निर्माणकर्ता बनाने के लिए लगातार कोशिश करते रहेंगे. हम उनके सपनों और उम्मीदों को पूरा करेंगे. जय भीम जय हिंद.
शाह ने ट्वीट किया, यह स्क्रिप्ट अब पुरानी हो चुकी है. हर चुनाव से पहले एक ही ग्रुप अपने हितों के लिए ऐक्टिव हो जाता है और आरक्षण को लेकर भ्रम फैलाने का काम करता है. बीजेपी का स्टैंड साफ है, हम बाबा साहेब के संविधान और दलितों को मिले अधिकारों में पूरा विश्वास रखते हैं. अमित शाह ने एससी-एसटी ऐक्ट को मजबूत करने को लेकर सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि हमने 2015 में संशोधन विधेयक लाकर इसे और मजबूत बनाने का काम किया है.
दलितों और आदिवासियों के भारत बंद का असर मोदी सरकार से लेकर बीजेपी तक देखने को मिल रहा है. यही कारण है कि सरकार के मंत्री से लेकर बीजेपी का नेतृत्व इस मामले में सफाई दे रहे हैं. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले में संसद में बयान दिया, वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ट्विटर पर अपनी बात रखी. उन्होंने यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि बीजेपी दलितों के खिलाफ नहीं है. अमित शाह ने दलित आंदोलन को चुनावी राजनीति करार देने के साथ ही यह भी बताने की कोशिश की है कि सरकार दलितों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है.
مولانا آزاد اور ان کی برسی کو یاد کرتے ہوئے۔
مولانا ابوالکلام آزاد, مولانا آزاد کے نام سے بھی جانا جاتا ہے۔, ہندوستان کے نامور اسکالر تھے۔, آزادی…








