Home Language Hindi NRC से खतरे में सभी धर्म के लोगCAA के खिलाफ हिंसा और प्रदर्शन को लेकर विदेशी राजनयिकों ने जताई चिंता
Hindi - Human Rights - Political - Politics - Social - December 30, 2019

NRC से खतरे में सभी धर्म के लोगCAA के खिलाफ हिंसा और प्रदर्शन को लेकर विदेशी राजनयिकों ने जताई चिंता

चुनावी रणनीतिकार और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने National Register Of Citizens (एनआरसी) को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। न्यूज एजेंसी ‘ANI’ से बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि ‘अगर कांग्रेस अध्यक्ष एनआरसी के मुद्दे पर एक भी बयान देतीं तो इससे काफी चीजें साफ हो जातीं…धरना और विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेना यह सब ठीक है…आखिर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से एनआऱसी को लेकर एक भी बयान क्यों नहीं आय़ा? यह मेरी समझ से बाहर है।’

प्रशांत किशोर का मानना है कि कांग्रेस अध्यक्ष या कांग्रेस वर्किंग कमेटी को कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को यह कहना चाहिए कि वो इस बात का ऐलान करें कि वो अपने-अपने राज्यों में एनआऱसी को लागू नहीं करेंगे। 10 से ज्यादा मुख्यमंत्रियों (जिनमें एक कांग्रेस के भी मुख्यमंत्री शामिल हैं) ने कहा है कि वो अपने राज्यों में एनआरसी की अनुमति नहीं देंगे। नीतीश कुमार, नवीन पटनायक, ममता बनर्जी और जगन मोहन रेड्डी अपनी-अपनी क्षेत्रिय पार्टियों के मुखिया हैं। लेकिन कांग्रेस के मामलों में उसके मुख्यमंत्री फाइनल डिसीजन नहीं ले सकते…बल्कि सीडब्लूसी के फैसले की सर्वमान्य होते हैं और वहीं सबसे बड़ी बॉडी है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि ‘मेरा सवाल यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष आधिकारिक तौर से यह क्यों नहीं कह रही हैं कि एनआऱसी को कांग्रेस शासित राज्यों में नहीं लागू किया जाएगा? जब कांग्रेस 10 साल सत्ता में थी तब उसने क्यों इस कानून में दिए गए प्रावधानों में बदलाव नहीं किया, जबकि उसके पास बदलाव करने के लिए मौके थे? CAA साल 2003 में बना। साल 2004 से 2014 तक कांग्रेस की सरकार सत्ता में थी। अगर यह एक्ट संविधान के खिलाफ था तो तब आखिर किस वजह से कांग्रेस ने इसमें बदलाव नहीं किया।”’

प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि वो गृहमंत्री अमित शाह की उस बात से इत्तिफाक नहीं रखते जिसमें उन्होंने कहा था कि एनपीआर औऱ एनआरसी के बीच कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा किसी को भी एननपीआर और एनआरसी के बीच संबंध होने या ना होने का सबूत दिखाने की जरुरत नहीं है। कागजात ही बताते हैं कि एनपीए किसी राज्य में एनआऱसी का पहला कदम है।

(अब आप नेशनल इंडिया न्यूज़ के साथ फेसबुकट्विटर और यू-ट्यूब पर जुड़ सकते हैं.)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

The Portrayal of Female Characters in Pa Ranjith’s Cinema

The notion that only women are the ones who face many problems and setbacks due to this ma…