گھر سماجی देश की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन पर पढ़िए उनके जीवन से जुड़ी खास बातें
سماجی - حالت - جنوری 3, 2018

देश की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन पर पढ़िए उनके जीवन से जुड़ी खास बातें

نئی دہلی. आज देश की पहली महिला शिक्षक, समाज सेविका, कवि और वंचितों की आवाज उठाने वाली सवित्रीबाई ज्योतिराव फुले का जन्मदिन है। सावित्रीबाई फुले ने अपने पति क्रांतिकारी नेता ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर लड़कियों के लिए 18 स्कूल खोले. उन्होंने पहला और अठारहवां स्कूल भी पुणे में ही खोला। 1852 में उन्होंने अछूत बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की।

सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 جنوری 1831 को हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले का विवाह1840 में ज्योतिबा फुले से हुआ था। महात्मा ज्योतिबा को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और बहुजन जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है।

ज्योतिराव, जो बाद में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। वे एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदिकवियत्री के रूप में भी जाना जाता था।

सावित्रीबाई पूरे देश की महानायिका हैं। हर बिरादरी और धर्म के लिये उन्होंने काम किया। जब सावित्रीबाई कन्याओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में लोग उन पर गंदगी, کیچڑ, گائے کا گوبر, विष्ठा तक फैंका करते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साड़ी बदल लेती थीं। अपने पथ पर चलते रहने की प्रेरणा बहुत अच्छे से देती हैं।

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एक ऐसे वक्त में जब महिलाओं को पढ़ना पापा मानता जाता था तब एक महिला प्रिंसिपल के लिये सन् 1848 में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना शायद आज भी नहीं की जा सकती। सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं, बल्कि दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया, वह भी पुणे जैसे शहर में।

10 اس دھمکی کے دوران سوشلسٹ فیکٹر کے ایڈیٹر 1897 کو طاعون के कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया। प्लेग महामारी में सावित्रीबाई प्लेग के मरीज़ों की सेवा करती थीं। एक प्लेग के छूत से प्रभावित बच्चे की सेवा करने के कारण इनको भी छूत लग गया। और इसी कारण से उनकी मृत्यु हुई।

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