घर क्रीडा वर अंबानी
क्रीडा - मे 19, 2017

वर अंबानी

टेस्ट क्रिकेट में अगर कोई बल्लेबाज बिना कोई चौका-छक्का लगाए पूरा दिन बल्लेबाजी करता है तो उसे बेहतरीन खिलाड़ी माना जाता था, लेकिन टी20 क्रिकेट के आने से हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. अगर बल्लेबाज क्रीज पर आने के 5 मिनट के अंदर कोई बड़ा शॉट नहीं लगाता तो दर्शक अपनी कुर्सी छोड़कर जाने के लिए तैयार हो जाते हैं. मतबल ये है कि आजकल क्रिकेट का मतलब सिर्फ चौके-छक्कों से ही है. इसका काफी श्रेय बल्लों की बनावट में आए बदलाव को भी जाता है. पिछले कुछ सालों में बल्लों को बनाने के तरीकों में कई तरह के बदलाव किए गए हैं जिससे गेंदबाजों पर बल्लेबाज हावी नजर आने लगे हैं.
वहीं क्रिकेट के कई दिग्गज गेंदबाजों के साथ हो रही इस नाइंसाफी की आलोचना कर चुके हैं. सभी का मानना है कि खेल में गेंदबाजों और बल्लेबाजों के लिए बराबरी का मौका होना चाहिए. इस दिशा में जल्द ही एक कदम उठाया जा रहा है. ब्रिटेन के रहने वाले एक भारतीय सर्जन ने बल्लों की बनावट को बदल कर खेल में संतुलन लाने का काम शूरू किया है. ऑर्थोपीडिक सर्जन चिनमय गुप्ते लंदन के इम्पीरियल कॉलेज की टीम के साथ इस शोध पर काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि पिछले 30 सालों में क्रिकेट के मैदान पर चौके-छक्कों की संख्या बढ़ गई है. इसका प्रमुख कारण नई बनावट के बल्ले हैं, इससे गेंदबाजों पर काफी दबाव भी बनता है. गुप्ते ने जो नया डिजाइन तैयार किया है उसके अनुसार बल्ले के किनारे की मोटाई 40 मिली मीटर से कम होगी और कुल गहराई 67 मिली मीटर से अधिक नहीं होगी. उनका मानना है कि इससे गेंदबाजों को भी खेल में बराबरी का मौका मिलेगा.

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