घर राज्य बिहार & झारखंड घरी परतणे: क्रोध प्रतीक्षा, कामगारांची संख्या

घरी परतणे: क्रोध प्रतीक्षा, कामगारांची संख्या

कोरोनामुळे देशभरात लॉकडाऊनचा सर्वाधिक त्रास कामगारांना होत आहे. जिथे एकीकडे रोजंदारी मजुरांचे उदरनिर्वाहाचे साधन संपले आहे, तर दुसरीकडे त्यांना खायला आणि राहण्यासाठी पोटभर अन्न आणि जागा नाही.. जिसके कारण वे अपने घर लौटने को मजबूर है. राज्यों में फंसे मजदूरों को सरकार ने उनके गृहराज्य पहुंचाने की बात कही लेकिन इसके बावजूद वे पैदल ही घर लौटने को मजबूर है. जिसके बाद देश के कई राज्यों से मजदूरों की भीड़ इक्ट्ठी हुई जो बेहद ही मायूस कर देने वाली है.

खरंच, ट्रेन में जाने की सुविधा ना मिल पाने पर महाराष्ट्र के मजदूरों में आक्रोश का माहौल बना हुआ है. वहां नागपाड़ा इलाके में मजदूर सड़कों पर उतरे और अपने गृहराज्य पहुंचाने की मांग की. उनकी मांगों को सुनने और उनको आश्वासन दिलाने की जगह पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया. जो बेहद ही निंदनीय है. वहीं गुजरात के कच्छ में भी कुछ ऐसा ही हंगामा हुआ, जहां कच्छ के गांधीधाम में सैकड़ों मजदूरों सड़कों पर निकल पड़े. बरसा दिए. मजदूरों का आरोप है कि उन्होंने टिकट के पैसे दिए हैं, लेकिन ट्रेन की व्यवस्था काफी दिनों के बाद भी नही की गई. जिसके बाद अपनी मांगों को पूरी करवाने के लिए उन्होंने हाइवे को ब्लॉक कर दिया. लेकिन मजदूरों की सुनने की बजाय वहां भी पुलिस ने दरिद्रता दिखाई और मजदूरों पर लाठीचार्ज किया.

इसके अलावा यूपी के सहारनपुर में सड़कों पर मजदूरों का गुस्सा फूटा. उनका कहना है कि उनके मालिकों ने हाथ खड़े कर दिए है इसलिए वे अपने घर लौटना चाहते है लेकिन बिहार सरका ने कोई व्यवस्था नही की है. साथ ही पंजाब के बठिंडा में सैकड़ों की तादाद में मजदूर स्टेशन पर इक्ट्ठे हुए ताकि श्रमिक ट्रेनों में बैठकर में घर जा सके लेकिन वहां कुछ नही मिला.

बता दें कि केवल उन्हीं मजदूरों को जाने की अनुमति दी जा रही है जिनकी जानकारी राज्यों द्वारा सरकार को दी जा रही है. जिसके कारण अब भी सैंकड़ों मजदूर अलग-अलग राज्यों में फंसे हुए है. लाचार मजदूरों को कोई सुविधा ना मिलने के कारण वे पैदल ही घर लौटना मुनासिफ समझ रहे है. लेकिन इसके चलते वे सड़क हादसे का शिकार भी हो जा रहे है जो उनके लिए सुरक्षित नही है.

(सहाय्यक प्राध्यापक आर्थिक पाटणा विद्यापीठ, तुम्ही Twitter आणि YouTube वर कनेक्ट करू शकता.)

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