घर Uncategorized त्याचं नाव म्हणायला ज्योती होतं, पण तो ज्वालामुखी होता…
Uncategorized - एप्रिल 11, 2022

त्याचं नाव म्हणायला ज्योती होतं, पण तो ज्वालामुखी होता…

भारत के भावी इतिहास को प्रभावित् करने के लिए उन्नीसवे एवं बीसवे शतक में पांच महत्वपूर्ण ग्रन्थ सार्वजनिक जीवन में अपना विशेष स्थान बना चुके थे |

इन बहुचर्चित पांच ग्रंथो ने न केवल भारत के सामाजिक जीवन को प्रभावित किया बल्कि राजनितिक एवं सांस्कृतिक जीवन में भी खलबली मचा दी |

मार्क्स-अन्गेल्स का सर्जन “कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो” (1848)
जोतीराव फुले का ग्रन्थ “गुलामगिरी” (1873)
मोहनदास करमचंद गाँधी की किताब “हिन्द स्वराज” (1909)
वि दा सावरकर की रचना “हिंदुत्व” (1923)
बाबासाहब डॉ आंबेडकर का ग्रन्थ “एनिहिलेशन ऑफ़ कास्ट” (1936)

गौर तलब यह है की….“कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो” में परिलक्षित मार्क्स का दर्शन भारतीय साम्यवादी पार्टी ओ का वैचारिक आधार है, “हिन्द स्वराज” एवं “हिंदुत्व” में परिलक्षित दर्शन उसमे भी खास कर सावरकर का दर्शन भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक आधार है| और“गुलामगिरी” एवं “एनिहिलेशन ऑफ़ कास्ट” में परिलक्षित फुले अम्बेडकरी दर्शन बहुजन समाज पार्टी का वैचारिक आधार है |

आज इन्ही ग्रंथो के प्रभाव में भारत के समूचे सामजिक एवं राजनितिक जीवन में उथल पुथल मची हुई है | जोतीराव के विचारो और उनके सामाजिक क्रांतीवाद के दर्शन की महत्ता का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है| “गुलामगिरी” (1873) के अलावा जोतीराव फुले की यह है प्रमुख रचनाए

(1) तिसरा रत्न (नाटक 1855),
(2) छत्रपति राजा शिवाजी भोसले का पवडा(1869),
(3) ब्राह्मणांची धूर्तता (1869)
(4) शेतकरी कोडा (1883),
(5) सत्सार: अंक -1 आणि 2 (1885),
(6) चेतावणी (1885),
(7) अस्पृश्य कॅफे (1885),
(8) सार्वजनिक सत्य पुस्तक (1889),
(9) सत्यवादी समाजासाठी उपयुक्त, मंगळथाना आणि सर्व उपासना पद्धती (जून 1887) आणि
(10) अखं‍डादि काव्यल रचनाएं है ।

और उनकी इन ग्रन्थ सम्पदा से उनका सामजिक क्रांतीवाद परिभाषित एवं परिलक्षित होता है और यह भी प्रतिपादित होता है की कहने को उनका नाम ज्योति था मगर वे ज्वालामुखी थे |

अशा महान व्यक्ती महात्मा जोतिराव फुले यांच्याबद्दल बाबासाहेब डॉ. अम्बेपडकर ने 28 ऑक्टोबर,1954 को पुरुंदरे स्टेडियम, मुम्बई में भाषण देते हुए कहा है की“तथागत बुद्ध तथा संत कबीर के बाद मेरे तीसरे गुरू ज्योतिबाफूले हैं । केवल उन्होंने ही मानवता का पाठ पढाया । प्रारम्भिक राजनीतिक आन्दोलन में हमने ज्योतिबा के पथ का अनुसरण किया । मेरा जीवन उनसे प्रभावित हुआ है ।“

यापूर्वी 10 ऑक्टोबर,1946 ते डॉ.. अम्बेकडकर अपनी पुस्तक “शूद्र कौन थे ?” महात्माब फूले को समर्पित कर चुके थे और समर्पित करते हुए उन्होंने लिखा की”ज्याने हिंदू समाजाच्या छोट्या जाती दिल्या, उच्च वर्णों के प्रति उनकी गुलामी की भावना के संबंध में जागृत किया और जिन्होंने विदेशी शासन से मुक्ति पाने से भी सामाजिक लोकतंत्र की स्थापना अधिक महत्वपूर्ण है, इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया, उस आधुनिक भारत के महान शूद्र महात्मा‍ फूले की स्मृति में सादर समर्पित ।

आज आधुनिक भारत की सामाजिक क्रांति के प्रणेता महात्मा जोतीराव फुले की 195 वी जन्म जयंती है इस मंगल अवसर पर शत शत नमन.

लेखक- जेडी चंद्रपाल, लेखक कवि व सामाजिक चिंतक

प्रतिक्रिया व्यक्त करा

आपला ई-मेल अड्रेस प्रकाशित केला जाणार नाही.

हे देखील तपासा

अस्पृश्यता आणि जातिभेदाची सर्रास प्रकरणे

सरस्वती विद्या मंदिरात अनुसूचित जाती समाजातील मुलाची हत्या…