घर चालू घडामोडी लडाखवर भारतीय सैन्याचे वर्चस्व आहे, नवीन सरकारी योजना किती कामगार ?

लडाखवर भारतीय सैन्याचे वर्चस्व आहे, नवीन सरकारी योजना किती कामगार ?

भारत आणि चीन यांच्यातील रक्तरंजित संघर्षात 20 जवान शहीद झाले. याबाबत लोकांमध्ये अजूनही नाराजी आहे, लेकिन वहीं अब लद्दाख में भारतीय सेना चीन की हर चाल का जवाब देने को तैयार है। ताकि अगर चीन किसी तरह की हिमाकत करता है तो उसे सबक सिखाया जा सके। भारत की तैयारियां सिर्फ गोले बारूद और हथियारों की तैनाती से ही नहीं हो रही हैं ब्लकि भारत अब लद्दाख में सरहद के तमाम इलाकों को कनेक्ट करने, वहां संचार के माध्यमों को चुस्त-दुरुस्त करने में जुटा है। अगर देखा जाए तो भारत की ये मुहिम भी सैन्य तैयारी जैसी ही है।

लद्दाख के सीमावर्ती गांवों में संचार सुविधा को मजबूत करने के केंद्र सरकार ने नया प्लान तैयार किया गया है। सरकार ने लद्दाख में 134 डिजिटल सैटेलाइट फोन टर्मिनल स्थापित करने की योजना बनाई गई है। लेकिन सोचने वाली बात है की सरकार को अगर इतनी ही परवाह अब जवानों की हो रही है तो सरकार की ये परवाह पहले कहा थी। क्यों सरकार को अब इसकी याद आई।

वहीं मिली जानकारी के मुताबिक पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कनेक्टिविटी पर 336.89 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अगर सिर्फ लद्दाख की बात करें तो इस पर 57.4 करोड़ रुपये की लागत आएगी, इससे जम्मू-कश्मीर के भी कई गांवों में लोग फोन सुविधा का फायदा उठा सकेंगे। लेकिन वहीं दूसरी तरफ विपक्ष पार्टियां और कई सामाजिक कार्यकर्ता और सोशल मीडिया पर लोग जमकर सरकार को खरी-खरी सुना रहे है।

लद्दाख में जिन महत्वपूर्ण इलाकों को सैटेलाइट फोन कनेक्शन मिलेगा, उनमें गलवान घाटी, दौलत बेग ओल्डी, हॉट स्प्रिंग्स, चुशूल शामिल है। ये सभी इलाके वास्तविक नियंत्रण रेखा से सटे हैं, गलवान घाटी में ही हाल में चीन से संघर्ष हुआ है, जबकि दौलत बेग ओल्डी में भारत का सैन्य ठिकाना है। यहां पर संचार व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी।

लेकिन बड़ा सवाल ये है की ये सुविधा कब तक शुरू होगी। सरकार की ओर से इसकी तीथि की तो कोई घोषणा नहीं हुई है। लेकिन कही सरकार के बाकी वादों की तरह ये वादा भी महज एक छलावा ना निकलें। लेकिन अगर ऐसा होता है तो नए मोबाइल नेटवर्क से यहां के लोगों की समस्या जरूर दूर होगी।

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