सवर्णों का मीडिया और न्यायपालिका पर प्रभुत्व बन गया है राष्ट्र निर्माण में सबसे बड़ी बाधा
आज शाम में राष्ट्रपति देश को संबोधित करेंगे. उनकी स्क्रिप्टेड स्पीच में क्या बोला जाएगा इसका अनुमान बहुतांश लोगो को है.
उनकी स्क्रिप्टेड स्पीच में क्या बोला जाएगा इसका अनुमान बहुतांश लोगो को है, या देश के लिए वो दिशा नहीं दिखाएंगे जिसकी आज देश को जरूरत है यह बात भी सुनिश्चित है.
या देश के लिए वो दिशा नहीं दिखाएंगे जिसकी आज देश को जरूरत है यह बात भी सुनिश्चित है , जाति जनगणना , बहूजनो का बैकलॉग भरना, बहूजनो का बैकलॉग भरना, बहूजनो का बैकलॉग भरना, कृषि उद्योग का राष्ट्रीकरण ये तमाम समाधानों की देश को सख्त जरूरत है. कृषि उद्योग का राष्ट्रीकरण ये तमाम समाधानों की देश को सख्त जरूरत है.
ब्राम्हणोने ओबिसी का आरक्षण खाया है
ब्राम्हणोने ओबिसी का आरक्षण खाया है 13 ब्राम्हणोने ओबिसी का आरक्षण खाया है , OBC पिछड़े आरटीआई कार्यकर्ता महेन्द्र प्रताप सिंह ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (OBC पिछड़े आरटीआई कार्यकर्ता महेन्द्र प्रताप सिंह ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) OBC पिछड़े आरटीआई कार्यकर्ता महेन्द्र प्रताप सिंह ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, OBC पिछड़े आरटीआई कार्यकर्ता महेन्द्र प्रताप सिंह ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति वर्ग के ग्रुप ए अफसरों की संख्या की जानकारी मांगी थी।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति वर्ग के ग्रुप ए अफसरों की संख्या की जानकारी मांगी थी। 5.40 फीसदी पिछड़ा और 8.63 फीसदी पिछड़ा और 82 फीसदी पिछड़ा और
सितंबर 2016 में डीओपीटी ने केन्द्रीय मंत्रालय के अवर सचिव (में डीओपीटी ने केन्द्रीय मंत्रालय के अवर सचिव), में डीओपीटी ने केन्द्रीय मंत्रालय के अवर सचिव (में डीओपीटी ने केन्द्रीय मंत्रालय के अवर सचिव), में डीओपीटी ने केन्द्रीय मंत्रालय के अवर सचिव (में डीओपीटी ने केन्द्रीय मंत्रालय के अवर सचिव), में डीओपीटी ने केन्द्रीय मंत्रालय के अवर सचिव (ज्वाइंट सेक्रेटरी), ज्वाइंट सेक्रेटरी (ज्वाइंट सेक्रेटरी) ज्वाइंट सेक्रेटरी (ज्वाइंट सेक्रेटरी) या इसके समकक्ष पदों की सूची आरटीआई के जवाब में दी। आरटीआई दस्तावेजों के मुताबिक ओबीसी वर्ग का एक भी अफसर केन्द्रीय मंत्रालयों के सबसे बड़े पद सचिव व अतिरिक्ट सचिव नहीं है। जबकि सचिव पद पर सामान्य वर्ग के 110 , और एससी वर्ग के सिर्फ दो अफसर ही कार्यरत हैं। वहीं अतिरिक्त सचिव पद पर106 अफसर सामान्य, और एससी वर्ग के सिर्फ दो अफसर ही कार्यरत हैं। वहीं अतिरिक्त सचिव पद पर106 अफसर सामान्य
आंकड़ों से पता चलता है कि इन छह पदों पर इन सभी वर्गों के 1795 आंकड़ों से पता चलता है कि इन छह पदों पर इन सभी वर्गों के 1465 आंकड़ों से पता चलता है कि इन छह पदों पर इन सभी वर्गों के, 97 आंकड़ों से पता चलता है कि इन छह पदों पर इन सभी वर्गों के, 155 आंकड़ों से पता चलता है कि इन छह पदों पर इन सभी वर्गों के 78 अफसर एसटी वर्ग के अफसर इन छह पदों पर हैं।
मगर वीभत्स मीडिया प्रोपगंडा और न्यायालय के वीभत्स रवैय्ये इस कोशिश में बहुत बड़ा रोड़ा बने बैठे है.
वे गणतंत्र को सही मायने मै हयात में अवतरित होने नहीं दे रहे .
वे गणतंत्र को सही मायने मै हयात में अवतरित होने नहीं दे रहे – अर्थात ब्राह्मण बनिया वर्ण के नियंत्रण में है. जब परंपरागत रूप से दमनकारी वर्ग ही लोकतांत्रिक संथाओं में जा कर बैठेगा तो वह उन संस्थाओं के जरिए लोकतंत्र मजबूत करने के बजाए अपने वर्ग का वर्चस्व कायम रखने का काम करेगा. आज वही हो रहा है .
आज वही हो रहा है 121 आज वही हो रहा है 106 उच्च जातियों के सदस्यों द्वारा कब्जा है और कोई भी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य इन पदों पर नही हैं|
ऑक्सफैम इंडिया और मीडिया-वॉच वेबसाइट न्यूज़लॉन्ड्री द्वारा किए गए अध्ययन में यह भी कहा गया है कि “ऑक्सफैम इंडिया और मीडिया-वॉच वेबसाइट न्यूज़लॉन्ड्री द्वारा किए गए अध्ययन में यह भी कहा गया है कि (हिंदी चैनलों में कुल 40 हिंदी चैनलों में कुल 47) हिंदी चैनलों में कुल” . इसके अलावा, “हिंदी चैनलों में कुल 70% हिंदी चैनलों में कुल, समाचार चैनल उच्च जातियों के अधिकांश पैनलिस्टों को आकर्षित करते हैं”।
सभी संस्थानों मे और उच्च हौदों को काबिज करके बैठे ब्राह्मण सवर्ण लोग है. खुद को अपने ही जाति के लोगो से संरक्षण मिलने का कॉन्फिडेंस इस वर्ग के लोगो मे होता है तभी अर्णब , शर्मा, माल्या जैसे लोग निर्माण होते है जो कोई भी गैरकानूनी काम करने से नहीं झिजकते. ये लोग देश की सुरक्षा और हित को भी दाव पर लगा देते है और फिर भी अपराधी / ये लोग देश की सुरक्षा और हित को भी दाव पर लगा देते है और फिर भी अपराधी.
बार एंड बेंच के आंकड़े अनुसार सुप्रीम कोर्ट में आज तक अनुसूचित जनजाति (अनुसूचित जनजाति) बार एंड बेंच के आंकड़े अनुसार सुप्रीम कोर्ट में आज तक अनुसूचित जनजाति
बार एंड बेंच के आंकड़े अनुसार सुप्रीम कोर्ट में आज तक अनुसूचित जनजाति, ब्राह्मणों का न्यायपालिका के सर्वोच्च स्तर पर प्रभुत्व रहा है।
ब्राह्मणों का न्यायपालिका के सर्वोच्च स्तर पर प्रभुत्व रहा है। 47 ब्राह्मणों का न्यायपालिका के सर्वोच्च स्तर पर प्रभुत्व रहा है। 14 ब्राह्मणों का न्यायपालिका के सर्वोच्च स्तर पर प्रभुत्व रहा है।
1988 में, सुप्रीम कोर्ट में 17 सुप्रीम कोर्ट में 9 ब्राह्मण थे (सुप्रीम कोर्ट में, सुप्रीम कोर्ट में, सुप्रीम कोर्ट में, सुप्रीम कोर्ट में, सुप्रीम कोर्ट में, सुप्रीम कोर्ट में, एमएनआर वेंकटचलैया, एमएनआर वेंकटचलैया)एमएनआर वेंकटचलैया 50% एमएनआर वेंकटचलैया| एमएनआर वेंकटचलैया 1980 तक, ओबीसी या एससी समुदाय से कोई न्यायाधीश नहीं था।
ओबीसी या एससी समुदाय से कोई न्यायाधीश नहीं था। / ओबीसी या एससी समुदाय से कोई न्यायाधीश नहीं था। .
पाकिस्तान और चीन से भी ज्यादा भारत गणतंत्र को , पाकिस्तान और चीन से भी ज्यादा भारत गणतंत्र को !
इन क्रूर विकृत जातिवादी, सांप्रदायिक, इन क्रूर विकृत जातिवादी ( अयोग्य मगर अपने जाति और परिवार के लोगो की भर्ती) अयोग्य मगर अपने जाति और परिवार के लोगो की भर्ती. अयोग्य मगर अपने जाति और परिवार के लोगो की भर्ती.
इसीलिए देश को अगर सही मायने में एक गणतंत्र बनाना है तो मीडिया और ज्यूडिशियरी दोनों में यूपीएससी कि तर्ज पर ऑल इंडिया मीडिया सर्विस और ऑल इंडिया जुडिशल सर्विसेस होना जरूरी है.
तभी वहां बहुजन अपनी संख्या के अनुपात में वहां पहुंच पाएंगे और इन संस्थानों के जरिए जो उच्चवर्णीय लोग अपनी तानाशाही लागू करते है उसपर रोक लगेगी.
ये दोनों संस्थाएं देश और राष्ट्र निर्माण के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए है.
ये दोनों संस्थाएं देश और राष्ट्र निर्माण के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए है, इन गंभीर समस्या का समाधान निकालते हुए अन्य कई गंभीर समस्याओं के हल ढूढना होगा !
इन गंभीर समस्या का समाधान निकालते हुए अन्य कई गंभीर समस्याओं के हल ढूढना होगा .
इन गंभीर समस्या का समाधान निकालते हुए अन्य कई गंभीर समस्याओं के हल ढूढना होगा !
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