घर सामाजिक संस्कृती छत्तीसगडमध्ये सतनामी समाज का संतापला आहे

छत्तीसगडमध्ये सतनामी समाज का संतापला आहे

जेव्हापासून केंद्रात भाजपाचे सरकार आले आहे, तब से भगवाधारियों के हौसले इस कदर बढ़ गए हैं कि वो अब बहुजन समाज के महापुरुषों का अपमान करने में भी पीछे नहीं रहते। बाबा साहब डॉ अंबेडकर तो उनके निशाने पर रहते ही हैं, परंतु आता छत्तीसगडमध्ये सतनामी समाजातील थोर पुरुष गुरु घासीदास यांचा अपमान केल्याची आणखी एक घटना समोर आली आहे, ज्याच्या विरोधात संपूर्ण राज्यातील सतनामी समाज चिडचिडे व आंदोलन करीत आहे.

संपूर्ण परिस्थिती आहे

दर्शन शास्त्र छत्तीसगढ़ पीएससी मुख्य परीक्षा के डेस्टिनी पब्लिकेशन रायपुर के संस्थापक निदेशक डॉ मनोज अग्रवाल ने दर्शनशास्त्र की किताब में सतनामी समाज के गुरु घासीदास और सतनामी पंथ की विशेषताएं बताने वाले अध्याय में गुरु घासीदास के लिए संवैधानिक रूप से प्रतिबंधित हरिजन शब्द का इस्तेमाल किया है। हरिजन शब्द महात्मा गांधी ने वर्तमान अनुसूचित जाति के लिए प्रयोग किया था जिसे अब प्रतिबंधित किया जा चुका है। अनुसूचित जाति के लोग इस शब्द को अपने लिए अपमानजनक मानते हैं।

सतनामी सोसायटी म्हणते, ‘ या पुस्तकाचे पान 16 चालू, आयएएस अ‍ॅकॅडमीच्या संचालकाने हा शब्द वापरणे ही एक गुंतागुंत आहे., आणि सतनामी समाजाच्या भावना जाणूनबुजून दुखावल्या गेल्या आहेत.

सतनामी समाजात प्रचंड संताप

किताब में गुरु घासीदास के लिए अपमानजनक शब्द के इस्तेमाल की खबर फैलते ही प्रदेश के सतनामी समाज में आक्रोश फैल गया और जगह-जगह समाज के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए। सतनामी समाज ने लेखक और प्रकाशक पर कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने शुरू कर दिए हैं। कई जगह सतनामी समाज के लोगों ने लेखक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है।

जांजगीर जिल्ह्यातील पामगड आणि अकालतारा पोलिस ठाण्यात सतनामी समाजातील लोकांनी या पुस्तकावर बंदी घालून लेखकाविरूद्ध कारवाई करावी अशी मागणी करणारे निवेदन राज्य गृहमंत्री यांना दिले.

जांजगीर में भीम आर्मी एकता मिशन ने भी लेखक डॉ मनोज अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

कांसाबेल में सतनामी समाज ने थाने जाकर ज्ञापन दिया। इसी तरह से नवागढ़ में सर्व सतनामी समाज के कार्यकर्ताओं ने थाना प्रभारी अंबार सिंग भरद्वाज को ज्ञापन सौंपा तथा पब्लिकेशन के द्वारा लिखे गए कथन को हटाने के लिए ज्ञापन दिया कथन नहीं हटाए जाने पर सतनामी समाज द्वारा उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी।

मुंगेली येथील एसपी कार्यालयात पोहोचलेल्या निवेदनाच्या या भागात सतनामी समाज युवा सेलच्या कार्यकर्त्यांनी लेखक व प्रकाशकावर कठोर कारवाईची मागणी केली असून तसे न झाल्यास हिंसक आंदोलन करण्याचा इशाराही दिला आहे.

सतनामी समाज जिल्हा बालोदा बाजार येथे गुरू घसीदास बाबा जी यांच्या चरित्राशी छेडछाड केल्याप्रकरणी सिटी कोतवाली बालोदा बाजार येथे डॉ. मनोज अग्रवाल यांच्या विरोधात एफआयआर दाखल करण्यात आला असून त्यांच्या अटकेची मागणी करण्यात आली आहे.

यापूर्वीही असे प्रयत्न झाले आहेत

सतनामी समाज और गुरु घासीदास के जीवन चरित्र को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिशें पहले भी होती रही हैं। कुछ समय पहले भी कबीर पंथ का उद्भव एवं प्रसार नामक किताब में गुरु घासीदास के भाइयों को ईसाई बताया गया था।

लेखक महंत डॉ राजेंद्र प्रसाद की इस किताब में यह भी लिखा था कि गुरु घासीदास ने कबीर की साखियों को विकृत किया था। तब भी सतनामी समाज काफी उग्र हुआ था।



2018 में तो एबीवीपी ने अपने प्रांतीय अधिवेशन के समय कचरे के डिब्बों पर गुरु घासीदास की तस्वीरों के पोस्टर लगा दिए थे। तब प्रदेश में भाजपा के रमन सिंह की सरकार थी। तब सतनामी समाज ने एबीवीपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी, मात्र भाजप सरकारच्या काळात काहीच होऊ शकले नसते.

लेखक माफी मागतो

सतनामी समाज के आक्रोश को देखते हुए किताब के लेखक डॉ मनोज अग्रवाल ने माफी मांगी है, लेकिन सतनामी समाज के लोग इतने से संतुष्ट नही हैं। लेखक और प्रकाशक ने अपने माफीनामे में इसे टाइपिंग मिस्टेक बताते हुए क्षमा-याचना की है, जबकि सतनामी समाज का मानना है कि स्पष्ट तौर पर यह टाइपिंग की गलती नहीं है, बल्कि लेखक ने जान-बूझकर प्रतिबंधित शब्द का इस्तेमाल किया है, इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी जरूरी है। समाज की मांग है कि किताब पर प्रतिबंधित किया जाए, और लेखक-प्रकाशक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

सतनामी समाज के वरिष्ठ जनों का कहना है बार-बार ऐसा महापुरुषों के जीवन परिचय के साथ छेड़छाड़ समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। सतनामी समाज इस विषय पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर रहा है। समाज का कहना है कि बार-बार सतनामी समाज और गुरु घासीदास के अपमान की घटनाएं हो रही हैं, और इन्हें अब बरदाश्त नहीं किया जा सकता है।

क्या है सतनामी समाज की अहमियत

छत्तीसगढ़ प्रदेश में सतनामी समाज की आबादी अच्छी-खासी है। कुल वोटों में इस समाज की करीब 16 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। प्रदेश की 14 विधान सभा सीटों पर 20 पासून 35 प्रतिशत वोट सतनामी समाज के हैं।

इसी वजह से 2017 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी सतनामी समाज को साथ लेने की कोशिश की थी और सतनामी गुरु बालदास से मुलाकात भी की थी।

हालांकि बाद में गुरु बालदास और अन्य सतनामी गुरुओं ने कांग्रेस पार्टी का समर्थन करने का ऐलान किया था। विधानसभा चुनावों में भाजपा की करारी हार में सतनामी समाज का बड़ा हाथ था।

यह लेख वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र यादव के अपने निजी विचार है ।

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