Home Social Health COVISHIELD बनाने वाली SII का मोदी सरकार पर बड़ा आरोप, WHO गाइडलाइन का ध्यान रखे बिना कर दिया Coronavirus Vaccine का ऐलान
Health - Hindi - International - Political - May 22, 2021

COVISHIELD बनाने वाली SII का मोदी सरकार पर बड़ा आरोप, WHO गाइडलाइन का ध्यान रखे बिना कर दिया Coronavirus Vaccine का ऐलान

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक सुरेश जाधव ने मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगया है।सरकार ने वैक्सीनेशन अभियान के विस्तार के दौरान वैक्सीन के उपलब्ध स्टॉक और WHO की गाइडलाइंस को ध्यान में नहीं रखा।

वैक्सीन की कमी को लेकर चारों ओर से घिरी मोदी सरकार ने इस मामले में किस कदर बिना सोचे-समझे काम किया, इसका पता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के कार्यकारी निदेशक सुरेश जाधव के बयान से चलता है। जाधव ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों का टीकाकरण शुरू कर दिया लेकिन इस बात की जांच तक नहीं की कि वैक्सीन का स्टॉक कितना है और इस बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की क्या गाइडलाइंस हैं।

एक ई-समिट में भाग ले रहे जाधव ने कहा कि सरकार को डब्ल्यूएचओ की ओर से बनाई गई गाइडलाइंस को मानना चाहिए और उस हिसाब से ही टीकाकरण की प्राथमिकता को तय करना चाहिए।

जाधव ने कहा, “शुरुआत में 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने की बात कही गयी थी और इसके लिए 60 करोड़ टीकों की ज़रूरत थी। लेकिन जब तक हम इस लक्ष्य तक पहुंचते, केंद्र सरकार ने 45 साल से ऊपर के लोगों के साथ ही 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए भी टीकाकरण को शुरू कर दिया।” 

जाधव ने कहा कि सरकार ने बावजूद इसके कि वह जानती थी कि इतनी बड़ी संख्या में वैक्सीन उपलब्ध नहीं हैं, यह फ़ैसला ले लिया।

जाधव ने कहा कि हमें इससे यह सबक मिलता है कि हम इस बात का ध्यान रखें कि हमारे पास कितना सामान है और उसके बाद सोच-समझकर ही उसका इस्तेमाल करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टीकाकरण ज़रूरी है लेकिन इसके बाद भी लोगों के संक्रमित रहने का ख़तरा बना रहता है।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के कार्यकारी निदेशक जाधव ने कहा, इसलिए यह ज़रूरी है कि हम सावधानी रखें और कोरोना से बचने के लिए बनाई गई गाइडलाइंस का पालन करें। उन्होंने कहा कि हालांकि भारतीय वैरिएंट के डबल म्यूटेंट को बेअसर किया जा चुका है लेकिन फिर भी यह वैरिएंट टीकाकरण में मुश्किलें पैदा कर सकता है।

भारत सरकार ने एलान किया था कि देश में 18-44 साल के लोगों को 1 मई से टीका लगाया जाएगा। लोगों ने इसके लिए ख़ुद को रजिस्टर कराना शुरू किया लेकिन वैक्सीन की कमी के कारण कई राज्यों को इस आयु वर्ग के लोगों का टीकाकरण रोकना पड़ा था। इनमें महाराष्ट्र और कर्नाटक शामिल हैं।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 से निपटने के लिए देश की पूरी आबादी के टीकाकरण पर 3.7 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह लागत जून तक राज्यों में होने वाले लॉकडाउन से 5.5 लाख करोड़ रुपये के संभावित आर्थिक नुकसान से कम होगा।

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