Home International Advocacy शिक्षक दिवस विशेष- सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर महिलाओं का पहला स्कूल खोलने वाली फातिमा शेख

शिक्षक दिवस विशेष- सावित्री बाई फुले के साथ मिलकर महिलाओं का पहला स्कूल खोलने वाली फातिमा शेख

आज शिक्षक दिवस है इस मौके पर सभी अपने गुरु को नमन करते है. लेकिन क्या आपको पता है शिक्षक दिवस पर भारत में स्त्री शिक्षा की शुरुआत करने वाली दो महानायिकाओं- सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख़ थी, जिन्होंने 1848 में लड़कियों का पहला स्कूल स्थापित किया और शिक्षा के द्वार हर किसी के लिए खोल दिए।

सावित्रीबाई ने महिलाओं और जाति उन्मूलन के लिए कई काम किए. लेकिन जिस एक काम के लिए उनकी ख्याति सबसे ज्यादा है, वह काम है 1848 में पुणे के भिडेवाड़ा में लड़कियों के लिए एक स्कूल खोलना और फिर वहां पढ़ाना.

लेकिन पुणे का वो स्कूल सावित्रीबाई ने अकेले नहीं खोला था, न ही वो वहां की एकमात्र महिला शिक्षिका थीं. कोई और भी था, जो इस प्रोजेक्ट में उनके साथ जुटा था. कोई था, जिसने बालिका सावित्रीबाई के साथ शिक्षा ग्रहण की थी, उनके साथ पुणे के अध्यापक प्रशिक्षण विद्यालय में ट्रेनिंग ली थी. कोई था, जिसने सावित्रीबाई और उनके पति को अपना घर रहने और स्कूल खोलने के लिए दिया था. कोई था, जो इस स्कूल में सावित्रीबाई के साथ पढ़ाता था.

हम बात कर रहे हैं फातिमा शेख की, जो सावित्रीबाई फुले की तरह ही देश के पहले गर्ल्स स्कूल की टीचर थीं.

फातिमा शेख ने लड़कियों, खासकर बहुजन और मुस्लिम समुदाय की लड़कियों को शिक्षित करने में सन्‌ 1848 के दौर में अहम योगदान दिया था। फातिमा शेख ने दलित महिलाओं को शिक्षित करने का प्रयास करने वाली सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ काम किया था।

सावित्री बाई फुले ने जिस वक्त बहुजनों के उत्थान के लिए लड़कियों को शिक्षित करने का काम शुरू किया,उन्हें घर से निकाल दिया गया। उस वक्त फुले दंपती को फातिमा शेख के बड़े भाई ने अपने घर में जगह दी थी। सावित्री फुले ने जब स्कूल खोला उस वक्त बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं मिल रहे थे, लेकिन फातिमा शेख ने उनकी मदद की और स्कूल में लड़कियों को पढ़ाया। उनके प्रयासों से ही जो मुस्लिम लड़कियां मदरसों में जाती थीं, वो स्कूल जाने लगीं। फातिमा शेख को बहुजन -मुस्लिम एकता के सूत्रधारों में से एक माना जाता है।

दरअसल, जिस एक काम के लिए सावित्रीबाई की ख्याति सबसे ज्यादा है, वह काम 1848 में पुणे के भिडेवाड़ा में लड़कियों के लिए एक स्कूल का खोलना और फिर वहां पढ़ाना है। लेकिन पुणे का वो स्कूल सावित्रीबाई ने अकेले नहीं खोला था, न ही वो वहां की एकमात्र महिला शिक्षिका थीं। कोई और भी था, जो इस परियोजना में उनके साथ जुटा था। 

कोई और था,जिसने बालिका सावित्रीबाई के साथ शिक्षा ग्रहण की थी, उनके साथ पुणे के अध्यापक प्रशिक्षण विद्यालय में ट्रेनिंग ली थी। कोई और था,जिसने सावित्रीबाई और उनके पति को अपना घर रहने और स्कूल खोलने के लिए दिया था। कोई और था, जो इस स्कूल में सावित्रीबाई के साथ पढ़ाता था। जी हां, वह कोई और नहीं, वह फातिमा शेख थीं। फातिमा शेख सावित्रीबाई फुले की तरह ही देश के पहले महिला विदायालय की शिक्षक थीं। 

फातिमा शेख मुस्लिम मोहल्लो में भी जाती थीं और परिवारों को स्त्री शिक्षा के बारे में बताता थीं। उन्हें एक साथ हिंदुओं और मुसलमानों के विरोध का सामना करना पड़ा। फातिमा शेख वह भारतीय मुस्लिम शिक्षिका थी, जो सामाजिक सुधारकों, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की सहयोगी थीं। फातिमा शेख मियां उस्मान शेख की बहन थी,जिनके घर में ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले ने निवास किया था।

जब फुले के पिता ने बहुजनों और महिलाओं के उत्थान के लिए किए जा रहे,उनके कामों की वजह से उनके परिवार को घर से निकाल दिया था। वह आधुनिक भारत में पहली मुस्लिम महिला शिक्षकों में से एक थीं और उसने फुले स्कूल में बहुजन बच्चों को शिक्षित करना शुरू किया था।

ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले,फातिमा शेख के साथ, बहुजन समुदायों में शिक्षा फैलाने का आरोप लगाया। फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं और उत्पीड़ित जातियों के लोगों को शिक्षा देना शुरू किया। लिहाजा,स्थानीय लोगों ने उन्हें धमकी दी। उनके परिवारों को भी निशाना बनाया गया और उन्हें अपनी सभी गतिविधियों को रोकना या अपने घर छोड़ने का विकल्प दिया गया। उन्होंने स्पष्ट रूप से घर छोड़ने का विकल्प चुना।

ज्योतिबा फूले दंपत्ति को न तो उनकी जाति और ना ही उनके परिवार और सामुदाय के लोगों ने उनका साथ दिया। आस-पास के सभी लोगों ने उन्हें त्याग दिया। उसके बाद यह जोड़ी आश्रय की तलाश में मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति उस्मान शेख के घर आए,जो पुणे के गंज पेठ में रह रहे थे। उस्मान शेख ने ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी को न सिर्फ अपने घर में आश्रय दिया, बल्कि घर में ही एक स्कूल चलाने पर सहमति भी दी। लेकिन फ़ातिमा शेख़ आज गुमनाम हैं और उनके नाम का उल्लेख कम ही मिलता है. आपको आपने बहुजन इतिहास के बारे में जरुर पढ़ना चाहिए।

खैर नेशनल इंडिया न्यूज की ओर से आप सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. शिक्षक दिवस पर भारत में स्त्री शिक्षा की शुरुआत करने वाली दो महानायिकाओं- सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख़ को नमन।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

The Portrayal of Female Characters in Pa Ranjith’s Cinema

The notion that only women are the ones who face many problems and setbacks due to this ma…